तीन दिवसीय उर्स-ए-कासमी का रविवार को समापन कुलशरीफ की फातिहा के साथ हुआ। फातिहा में डेढ़ लाख जायरीन पहुंचे। सभी ने विश्व में अमन की दुआ मांगी।
दरगाह शरीफ के सज्जादानशीन प्रोफेसर सैयद अमीन मियां कादरी ने अपनी तकरीर में कहा कि बरकातियों का सरकारी मसलक मसलके आला हजरत है। मसलके आला हजरत हमें अपने नबी से मोहब्बत करने और इस्लामी जिंदगी जीने का तरीका सीखता है।
इमाम अहमद रजा खां साहब ने मारहरा में आकर अपने पीर सैयद आले रसूल से निसबत पाई।
आज दुनियाभर में मसलके आला हजरत का बोलबाला है। करोड़ों सुन्नी मुसलमानों के दिलों की धड़कन आला हजरत है तो वही सुन्नियों की रूहानी राजधानी मारहरा शरीफ है। सज्जादानशीन सैयद नजीब हैदर नूरी ने कहा कि आज हम सुन्नी मुसलमान बिखरे हुए हैं। हम सुन्नियों को एक होने की जरूरत है।
कानपुर से आए मुफ्ती हनीफ साहब ने कहा कि हमसे वतन की वफादारी का सुबूत मांगा जाता है। हम वतन के लिए जान ले भी सकते हैं और जान दे भी सकते हैं। कुलशरीफ की महफिल में पाकिस्तान-बांग्लादेश से आए नातख्वाओं ने नात-ए-कलाम पेश कर पार्क में मौजूद जायरीन की हौसला अफजाई की।
इसके बाद देश-दुनिया में चैन, सुकून के लिए दुआ मांगी। इस मौके पर सगीर अहमद जोगनपुरी, अल्लामा यासीन अख्तर मिस्बाही, मुफती मोहम्मद हनीफ साहब, बरेली शरीफ के सज्जादानशीन सुबहानी मियां, मैनपुरी खानकाहे रशीदिया के सज्जादानशीन बबजलू मियां, बदायूं शरीफ के सज्जादानशीन सालिम मियां साहब आदि मौजूद रहे।