फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Etah News: कमर्शियल सिलिंडर की किल्लत से भट्ठी पर आया कारोबार

Tue, 17 Mar 2026 11:59 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
विज्ञापन
विज्ञापन
एटा। कमर्शियल गैस सिलिंडर की किल्लत ने छोटे-बड़े कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। मिठाई की दुकानों से लेकर नाश्ता–चाय के ठेलों तक हर जगह गैस का संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में कई ठेला-हथठेला संचालक मजबूर होकर घर बैठ गए जबकि बाकी ने काम चलाने के लिए भट्ठी जलाना शुरू कर दी हैं।
विज्ञापन

पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध के चलते गैस उपलब्धता कम हुई है। व्यापारियों का कहना है कि सिलिंडर नहीं मिलने से व्यापार में कमी आ रही है। इसका निदान तलाशते हुए दुकानदारों ने गैस भट्ठियों की जगह कोयले और लकड़ी की भट्ठियों का प्रयोग शुरू कर दिया है। मेहता पार्क के पास नाश्ते का ठेला लगाने वाले अमन कुमार ने बताया कि पिछले सप्ताह गैस नहीं मिलने की वजह से उनका रोजगार पूरी तरह बंद हो गया। तीन दिन तक घर बैठे रहे फिर मजबूरी में अपने स्तर पर लकड़ी की भट्टी बनाकर काम दोबारा शुरू करना पड़ा। गैस के सहारे जितना काम हो जाता था उतना अब नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि शहर के लगभग एक दर्जन से अधिक ठेले और हथठेला संचालक गैस न मिलने से अभी भी घरों पर बैठे हैं। जो काम कर रहे हैं वो भी भट्ठी से बढ़े खर्च धीमी गति और धुएं की समस्या से जूझ रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि अगर गैस आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो रोज कमाने-रोज खाने वालों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। वे प्रशासन और गैस कंपनियों से मांग कर रहे हैं कि कमर्शियल सिलिंडर की सुचारु आपूर्ति बहाल की जाए ताकि उनका रोजमर्रा का रोजगार बचा रह सके।
विज्ञापन






पिछले कई दिनों से एक कनेक्शन पर केवल एक ही कमर्शियल सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। जबकि नाश्ता, चाय और फास्ट-फूड का कारोबार में सिलिंडर 15 दिनों में कम से कम दो से तीन सिलिंडरों की जरूरत पड़ती है। - अमन सक्सेना, मेहता पार्क




कमर्शियल सिलिंडर न मिलने से काम पर घर बैठना पड़ा था। मजबूरी में भट्टियां लगाकर कार शुरू कर दिया है जो काम गैस से आराम से हो रहा था लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। छूट के नाम पर केवल लॉलीपॉप दिया गया है। - पम्मी, कैलाशगंज





तेलों के दाम बढ़े, उपभोक्ताओं की रसोई पर महंगाई की मार

एटा। खाड़ी देशों में जारी युद्ध की गर्मी अब जिले के बाजार तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में बाधा व आयात लागत बढ़ने से शहर में रिफाइंड, पाम ऑयल व वनस्पति घी समेत सभी प्रकार के खाद्य तेलों की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। पिछले एक सप्ताह में ही रिफाइंड तेल के दाम पांच रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा बोझ पड़ने लगा है।
खाद्य तेलों की कीमतों में पिछले एक सप्ताह से लगातार बढ़ोतरी जारी है। मसालों, रिफाइंड, सरसों के तेल, 15 दिन में दामों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं दाल, चाय पत्ती, चीनी, मेवा व वस्तुओं के दाम स्थिर हैं। 750 मिलीलीटर सोयाबीन रिफाइंड का पाउच जो पहले 125 रुपये में मिल रहा था अब 130 रुपये में बिक रहा है। 15 लीटर रिफाइंड टीन जिसकी कीमत पहले लगभग 2400 रुपये थी अब बढ़कर 2470 रुपये तक पहुंच गई है।
व्यापारियों का कहना है कि बाजार में अभी भी स्थिरता नहीं है और दामों में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है। घंटाघर स्थित खाद्य तेल दुकानदार शोभित ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता कंटेनरों की कमी, परिवहन लागत में बढ़ोतरी व खाड़ी देशों से आयात प्रभावित होने के कारण कंपनियों ने तेल के दाम बढ़ाए हैं। महंगाई की बढ़ती रफ्तार ने शहर के उपभोक्ताओं को अपनी खरीदारी की आदतें बदलने पर मजबूर कर दिया है। जो ग्राहक पहले एक बार में दो लीटर तेल खरीदते थे वे अब एक लीटर तक सीमित हो गए हैं। दुकानदार निर्मल कुमार ने बताया कि नए सामानों में साबुन, सर्फ के वजन में कमी की गई है कहा कि कंपनी से माल का आर्डर दिया तो पता चला कि नए सामान के वजन घटा दिए गए हैं।









खाड़ी देशों में जारी युद्ध से असर पड़ रहा है खाद्य तेलों पर 5 रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है। वहीं जानकारी मिली है कि खाद्य वस्तुओं व साबुन सर्फ के वजन घट गए हैं। - विष्णु वार्ष्णेय, दुकानदार






महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है जिससे घर का वजट प्रभावित हो रहा है। गैस पर पहले से ही 60 रुपये बढ़ चुके हैं, वहीं तेल व वनस्पति घी पर 5 रुपये की बढ़ोत्तरी हो गई है। - नितम भारद्वाज, चित्रगुप्त कॉलोनी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें