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आमने-सामने आए रोडवेज-प्राइवेट बस चालक, असलाह तने

Sun, 16 Aug 2015 07:11 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
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रोडवेज बस स्टैंड पर सवारियां भरने की तनातनी अब झगड़े में बदलती जा रही है। यहां सवारियां भरने को लेकर आए दिन प्राइवेट और रोडवेज बस के चालक-परिचालकों में झगड़ा होना आम बात हो गई है। रविवार को सुबह तो झगड़ा इतना बढ़ गया कि रोडवेज प्रशासन को भी सड़क पर उतरना पड़ा। झगड़े को लेकर रोडवेज मजदूर सभा और संयुक्त परिषद ने प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। हालात बिगड़ते देख एआरएम संजीव यादव और डिपो प्रभारी अनवर बेग रोडवेज बस स्टैंड पहुंचे और कर्मचारियों को मामले में डीएम से कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया। तब जाकर कर्मचारियों ने रोडवेज बसों का संचालन शुरू किया।
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रोडवेज कर्मचारियों ने बताया कि प्राइवेट डग्गामार बसों का रोडवेज बस स्टैंड पर खुला आतंक है। डग्गामार बसों के मालिकों द्वारा आए दिन रोडवेज कर्मचारियों के साथ मारपीट की जाती है। इस लिए रोडवेज कर्मचारियों एवं अनुबंधित बस मालिकों में रोष व्याप्त है। उन्होंने बताया कि शनिवार को डग्गामार बसों के मालिकों द्वारा रोडवेज कर्मचारियों को धमकी दी गई थी कि हम रोडवेज बस स्टैंड से ही सवारियां भरेंगे। इसके बाद रविवार को डग्गामार बसों के मालिक पूर्वाह्न 11 बजे के आसपास असलाहों से लैस होकर बस स्टैंड पर आ धमके और रोडवेज कर्मचारियों के साथ बदसलूकी करने लगे। इसे लेकर कर्मचारियों एवं अनुबंधित बस मालिकों में काफी रोष है।
मामले को लेकर एआरएम संजीव यादव और डिपो प्रभारी अनवर बेग का कहना है कि मामले को गंभीरता के साथ लिया जा रहा है। आगे से ऐसी को अप्रिय घटना न घटित हो, इसके लिए डीएम को भी इस मामले से अवगत कराया जाएगा। अभी तक इस मामले में कोई तहरीर पुलिस को नहीं मिली है। रविवार को घटना का विरोध करने वालों में रोडवेज मजदूर सभा के प्रांतीय उपाध्यक्ष मुरारी लाल यादव, अध्यक्ष सुरेंद्र यादव, संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रामवीर सिंह तोमर के अलावा संतोष यादव, गजेंद्र यादव, हरिगोविंद शर्मा, राजकुमार, दरवारी लाल यादव, मुन्नालाल यादव, मुजीव खां, जयपाल सिंह यादव आदि रोडवेज के कर्मचारी मौजूद थे।
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रोडवेज के रंग में दौड़ रही प्राइवेट बसें, प्रशासन बेखबर
एटा। रविवार को हुए झगड़े की मुख्य वजह वे प्राइवेट बसें हैं, जो रोडवेज बसों के कलर में दौड़ रही हैं। इसके अलावा उन बसों पर उप्र परिवहन निगम भी लिखा हुआ है। इसके  चलते वे बसें रोडवेज बसों पर आकर खड़ी हो जाती हैं, और आसानी से सवारियां भरकर निकल जाती हैं। इस पर रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
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