एटा में जिले में सूखे का असर धान की खरीद पर साफ भी दिख रहा है। जिले में मंगलवार तक छह हजार मीट्रिक टन लक्ष्य के सापेक्ष अब तक कुल 75.40 एमटी ही धान की खरीद हो सकी है। खाद्य विपणन विभाग की मानें तो जिले में निर्धारित धान के कुल आच्छादन क्षेत्र में 20 प्रतिशत ही मोटे चावल वाला धान हुआ है। इसमें भी सूखे के चलते 55 प्रतिशत धान की फसल प्रभावित हुई है।
साल दर साल जिले के किसान मोटे चावल वाले धान की फसल को कम करते जा रहे हैं। सरकारी खरीद केंद्रों पर भी किसान इसी धान को लेकर आते हैं। पिछले कुछ सालों से लक्ष्य के सापेक्ष धान की खरीद न हो पाने के चलते खाद्य व कृषि विभाग इसका कारण बाजार में इसकी कम कीमत भी बता रहे हैं। किसानों द्वारा की जाने वाली बासमती, पीटेन, सुगंधा आदि धान की फसलों की कीमत बाजार में मोटे वाले धान की तुलना में दो से तीन होती हैं। वहीं, इनकी पैदावार भी इससे कहीं अधिक होती है। पिछले वर्ष पीटेन धान मंडी में 38 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक बिक गया था, लेकिन अरब देशों में चावल इस वर्ष पीटेन, सुगंधा व बासमती की कीमतें मंडी में भी कम रही हैं।
सूखे के हालातों के चलते शासन ने इस बार जिला खाद्य विपणन विभाग को छह हजार एमटी धान खरीद का लक्ष्य दिया था। शासन द्वारा धान का समर्थन मूल्य भी 1360 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। इसके लिए जिले में चार विभागों के 12 केंद्र बनाए गए हैं, जबकि पिछले वर्ष केंद्रों की संख्या 21 थी। जिले में मोटे धान की पैदावार की स्थिति तो इससे ही पता चलती है कि धान खरीद में एफसीआई का तो अब तक खाता भी नहीं खुल सका है।
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धान खरीद का ब्यौरा
विभाग केंद्र संख्या लक्ष्य कुल खरीद
खाद्य विभाग 3 1500 24.40
पीसीएफ 7 3500 25.00
यूपीएसएस 1 500 26
एफसीआई 1 500 00
मंडी में हो रही धान की खरीद
एटा। जिले में सरकारी धान खरीद जहां सुस्त चल रही है, वहीं मंडी समिति में धान की खरीद अब भी जारी है। मंडी में धान की कीमतें 15 सौ से 24 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रही हैं। मंडी व्यापारियों की मानें तो मंडी में प्रतिदिन एक हजार क्विंटल के हिसाब से धान पहुंच रहा है।
जिले में धान के कुल आच्छादन क्षेत्र में से 20 प्रतिशत ही मोटे वाले धान की फसल हुई है। इसमें भी सूखे से 55 प्रतिशत पैदावार प्रभावित हो गई है। यही कारण है कि इस बार धान की खरीद कम हो पाई है।
-- विनय प्रताप सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, एटा।