कभी देश भक्ति का संचार, तो कभी प्रेम का शृंगार। कभी हास्य पर लोटपोट होते श्रोता, तो कभी व्यंग्य पर लगते ठहाके। कवियों की पंक्तियों ने दिल को छुआ, तो बरबस ही तालियों का शोर गूंज उठा। कुछ ऐसे ही नजारे शनिवार रात को घंटाघर जैन मेला पांडाल में नजर आए। मौका था अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का।
कार्यक्रम का उद्घाटन नगर पालिकाध्यक्ष राकेश गांधी ने किया। वहीं दीप प्रज्वलन अजय जैन ने किया। इसके साथ ही डा. रूपा जैन, विजय कुमार जैन ने सभी का स्वागत किया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ लखनऊ से आई कवियित्री व्यंजना शुक्ला ने सरस्वती वंदना से किया। वहीं लखनऊ से पधारीं व्यंजना शुक्ला द्वारा प्रस्तुत की गई। मंदसौर से पधारे हास्य कवि मुन्ना बैटरी ने पढ़ा कि ‘फूल जैसे बच्चों को आप घी की जगह कुरकुरे खिलाओगे। तो बताओ इस देश की रक्षा के लिये सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह कहां से लाओगे?’ छाता मथुरा से आए लवगुरु कवि गीतकार श्याम सुंदर अकिंचन ने सुनाया कि ‘चोट दर चोट सहता है, ये घायल का मुकद्दर है। लिपटी पांव से बजती ये पायल का मुकद्दर है।’ दिल्ली की कु. प्रियंका राय ओउम नंदिनी ने पढ़ा कि सत्य अहिंसा ब्रह्मचर्य का ले आंखों में नीर चले। पशुओं का हित होय जगत में लेकर उनकी पीर चले...।’ ग्वालियर से आए कवि राजकिशोर राज ने सुनाया कि प्यार कब हो गया ये पता ही नहीं, दिल कहां खो गया ये पता ही नहीं।’ व्यंजना शुक्ला ने पंक्तियां पढ़ीं कि बहुत थे रंग जीवन में हमें भरना नहीं आया। हमें नाज़ुक पलों में फैसला करना नहीं आया। जौरा मप्र से आए व्यंगकार तेजनारायण शर्मा ने सुनाया कि जो किये गये उन वादों का क्या हुआ? हुकूमत के नेक इरादों का क्या हुआ? हाथरस से पधारी मनु दीक्षित ने पढ़ा कि जीवन का सिखलाता जो मर्म, उस मर्म का मूल स्रोत है जैन धर्म। संयोजक राजेश जैन गीतकार ने कहा कि कौन कहता है कि हम, कहकर मुकर जाते हैं। हम तो हर राह से, हंस हंस के गुजर जाते हैं। संचालक डा. शिव ओम अंबर ने सुनाया कि लफ़्ज़ों में टंकार बिठा, लहजे में खुद्दारी रख। इटावा से आए कवि गौरव चौहान ने मुनि तरुण सागर पर टिप्पणी करने वालों को ललकारते हुए सुनाया कि इच्छाओं पर विजय श्री का सुख उठाकर देखो, बिन कपड़ों के अपने तन का बोझ उठाकर देखो। इस मौके पर विनय जैन बिजली, महेश मंजुल, अच्युतं केशव, सुरेश जैन, प्रदीप जैन, अनिल जैन, मोहित जैन, प्रतीक जैन, सुनील बांदा मौजूद रहे।