एटा। मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विभाग में दांतों और मसूड़ों से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित 125 मरीजों को उपचार दिया गया।
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना यादव ने बताया कि छोटे बच्चों में भी दांतों में सड़न की समस्या देखने को मिल रही है। खासकर बोतल से दूध पीने वाले बच्चों के दांतों में कैविटी की परेशानी सामने आ रही है। इसके साथ ही दंत रोग विभाग में उपचार लेने वाले मरीजों में पायरिया के 50 और कैविटी के 40 मरीज शामिल रहे। इसके अलावा मुंह के कैंसर से पीड़ित दो मरीजों को भी उपचार दिया गया। अन्य मरीज दांतों में दर्द, मसूड़ों में सूजन आदि की समस्याओं को लेकर उपचार लेने पहुंचे।
उन्होंने बताया कि दांतों की नियमित सफाई नहीं करना, मीठे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन दांतों की समस्याओं को बढ़ा सकता है। बच्चों को लंबे समय तक दूध की बोतल मुंह में लेकर सुलाने से भी दांतों में सड़न का खतरा बढ़ता है।
दांतों और मसूड़ों की बीमारियों से बचाव के लिए दिन में दो बार ब्रश करना जरूरी है। मसूड़ों से खून आने, दांतों में लगातार दर्द रहने, मुंह में घाव होने या घाव ठीक नहीं होने पर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
दांतों की बीमारियों के लक्षण
- दांतों पर काले या भूरे धब्बे, ठंडा-गर्म लगना और दांत में दर्द।
- मसूड़ों से खून आना, सूजन, मुंह से दुर्गंध आना और दांतों का हिलना।
- मसूड़ों का लाल होना, दर्द होना और ब्रश करते समय खून निकलना।
- मुंह में घाव का लंबे समय तक ठीक न होना, सफेद या लाल धब्बे, गांठ या मुंह खोलने में परेशानी।
बचाव के उपाय
- दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें।
- बच्चों को बोतल मुंह में लेकर सोने न दें और दूध पिलाने के बाद उनके मसूड़ों व दांतों की सफाई करें।
- मीठे खाद्य पदार्थों और मीठे पेय का सेवन सीमित रखें।
- नियमित रूप से दंत चिकित्सक से जांच कराएं।
- तंबाकू, गुटखा और धूम्रपान से दूर रहें।
- मुंह में घाव या असामान्य धब्बे दिखने पर जल्द चिकित्सकीय जांच कराएं।
दंत रोग विभाग सबसे ज्यादा पायरिया, मसूड़ों में सूजन के साथ अन्य बीमारी के मरीज उपचार ले रहे हैं। सबसे अधिक कैविटी के मरीज उपचार लेने के लिए पहुंच रहे हैं। - डॉ. अर्चना यादव, दंत रोग विशेषज्ञ