नोट बंदी के बहाने केंद्र सरकार ई-पेमेंट यानी कैशलेस व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। बाजार में नकदी संकट का फायदा उठा कर सरकार ई-वॉलेट से ज्यादा से ज्यादा भुगतान की सलाह दे रही है। जिले की करीब 20 लाख आबादी में जिला मुख्यालय पर घंटाघर, हाथीगेट, बाबूगंज, सराफा बाजार, गांधी मार्केट के अलावा जलेसर और अलीगंज में छोटी दुकानों की भरमार है। ऐसे में यह कितना कारगर साबित होगा यह भविष्य के गर्त में है। वहीं, सरकार ने खाद और बीज पर भी ई-बिक्री लागू कर दी तो सैकड़ों दुकानें चलने लायक नहीं बचेंगी। जिले में करीब 15 लाख से अधिक बैंक खाते हैं। इनमें से करीब सात लाख से अधिक लोगों के पास एटीएम कार्ड तक नहीं हैं।
दुकानें 50 हजार, 10 हजार के ही पंजीकरण
तहसील, जिला मुख्यालय और गली मोहल्लों में गारमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, डिपार्टमेंटल स्टोर, होटल, जनरल स्टोर्स, किराना स्टोर्स, ज्वेलरी, शूज शोरूम, ब्यूटी पार्लर, टेलर्स, कबाड़, बांसबल्ली, मेडिकल स्टोरर्स, सैलून, भवन निर्माण सामग्री जैसी जिले में करीब 50,000 हजार दुकानें हैं। लेकिन व्यापार कर विभाग में अभीतक तक सिर्फ 9 से 10 हजार के बीच पंजीकरण हैं। इनमेें भी होटल, ज्वेलरी, गारमेंट शॉप, व्यापारी, होटल पेट्रोल पंप मिला कर करीब 600 लोग आरटीजीएस और स्वाइप मशीनों से भुगतान करते हैं। व्यापार कर विभाग ने पांच लाख रुपये सालाना टर्न ओवर वाले व्यापारियों को पंजीकरण कराना अनिवार्य किया था, लेकिन पंजीकरण की संख्या बेहद कम है। ऐसे में 50 प्रतिशत तो दूर जिले में दस प्रतिशत लोग कैशलेस सुविधा नहंी स्वीकार सकते। ।
ई-पेमेंट करने वाले की संख्या जिले में सीमित
जिले में ई-पेमेंट करने वालों की संख्या सीमित हैं। वाणिज्य कर विभाग के अफसरों की माने तो लोगों के पास स्मार्ट फोन तो है, लेकिन इंटरनेट फ्रेंडली नहीं हैं। मदद के लिए दूसरे के पास जाएंगे तो खाते से रकम उड़ सकती है। जिले में व्यापरियों के अलावा सिर्फ युवाओं का बड़ा वर्ग डीटूएच, पेटीएम, मनी ट्रांसफर, मोबाइल-रिचार्ज में ई-पेमेंट का इस्तेमाल करता है। वहीं, जिले में 15 लाख से अधिक लोगों के बैंक में खाते हैं, लेकिन कृषि प्रधान जिला होने के कारण आधे से ज्यादा लोगों के पास एटीएम कार्ड नहीं है। कुछ अधिवक्ता, अफसर या एलीट क्लास के लोग होटल या रेस्टोरेंट में खाना खाने या शॉपिंग के वक्त ई-पेमेंट करते हैं।
चिकित्सकों और पेट्रोल पंप पर नहीं स्वाइप मशीनें
निजी प्रैक्टिस करने वाले एक चिकित्सक के यहां स्वाइप मशीन नहीं लगी है। सभी डॉक्टर मरीजों से कैश में फीस लेते हैं। कमोवेश यही हाल मेडिकल स्टोर का है। वहीं, जिले में विभिन्न कंपनियों के करीब 100 पेट्रोल पंप हैं, लेकिन दो या तीन को छोड़ दें किसी भी पेट्रोल पंप संचालक ने भुगतान लेने के लिए स्वाइप मशीन नहीं लगा रखी है।