जेल में चल रहा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। दूसरी जेलों में शिफ्ट किए गए बंदियों की वापसी, अवैध वसूली, स्टाफ बदलने की मांग को लेकर बुधवार रात से बंदी भूख हड़ताल पर बैठ गए। सूचना मिलते ही जेल प्रशासन के साथ पुलिस-प्रशासन के भी हाथ-पैर फूल गए। गुरुवार की सुबह बंदियों को मनाने जेल पहुंच गए। एडीएम प्रशासन के अनुसार दोपहर ढाई बजे बंदियों की भूख हड़ताल तुड़वा दी गई।
जिला जेल में बीते तीन दिनों से बरपा हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। रुटीन चेकिंग के दौरान एक बंदी से मोबाइल व सिम मिलने के बाद हुई झड़प के बाद कुछ बंदियों को दूसरी जेल में शिफ्ट कर देने व खाना सही न मिलने पर बुधवार की रात फिर बंदी भड़क गए और खाना खाने से इंकार कर दिया। जेल प्रशासन द्वारा काफी मनाने के बाद भी वह नहीं माने और सुबह नाश्ता भी नहीं लिया। जैसे ही जिला प्रशासन को इसकी जानकारी हुई तो एडीएम प्रशासन लालमणि मिश्र, एएसपी विसर्जन सिंह, एसडीएम अजीत कुमार सिंह, सीओ सिटी करन सिंह आदि जेल पहुंच गए और भूख हड़ताल पर बैठे बंदियों को मनाने में जुट गए, लेकिन सुबह तक वह नहीं माने और अपनी मांग पर अड़े रहे। होली मनाने से भी इंकार कर दिया।
बंदियों ने मांग रखी कि जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर व दोषी बंदी रक्षकों का स्थानांतरण किया जाए। अवैध वसूली पर रोक लगे। जो बंदी साथी दूसरी जेलों में भेजे हैं उन्हें वापस बुलाया जाए। दर्ज रिपोर्ट वापस हो व खाना सही नहीं मिल रहा इसकी जांच हो। दोपहर ढाई बजे प्रशासन ने बंदियों की कुछ मांगें मानते हुए भूख हड़ताल तुड़वा दी। दूसरी ओर सूत्रों का कहना है कि अभी पूरी तरह से भूख हड़ताल समाप्त नहीं हुई है। कुछ बंदियों ने अभी खाना नहीं खाया है।
पूरे जेल प्रशासन को हटाने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। खाने की शिकायत पर सैंपल लेकर प्रयोगशाला भेजा गया है। दो रायटर्स भी हटाकर दूसरी जेलों में शिफ्ट किए जाएंगे। बंदियों को समझा-बुझाकर दोपहर ढाई बजे भूख हड़ताल तुड़वा दी गई है।
-लालमणि मिश्र, एडीएम प्रशासन
जेल में बंटे हैं ग्रुप
बताते हैं कि कुछ बैरकाें के दमदार बंदियों ने भूख हड़ताल करने का ऐलान किया। जिसके दबाव के चलते अन्य बंदी भी भूख हड़ताल पर चले गए। कुछ बंदियों के डर के चलते न चाहते हुए भी कुछ बैरकों के बंदी भूख हड़ताल पर रहे।
बंदियों से मिलने को परेशान दिखे परिजन
जिला जेल में एक बार फिर बंदियों द्वारा की गई भूख हड़ताल के बाद उनके परिवारीजनों को परेशानी झेलनी पड़ी। जेल में बंद बंदियों से मिलने के लिए घरवाले उतावले दिखे। जमानत पर रिहा हो रहे बंदी भी काफी देरी से छूटे, वहीं मिलाई करने पहुंचे परिवारीजनों को घंटों इंतजार करना पड़ा। दोपहर बाद बंदियों से उनके परिवारीजन मिल सके।