एटा। समाज कल्याण विभाग से एक विभाग के कर्मचारी मनोज कुमार निवासी बलेसरा थाना जलेसर को 3,600 का चेक जारी किया गया। इसमें धनराशि 30,600 दर्शाकर बैंक में लगा दिया गया। फर्जीवाड़ा साबित होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल कुमार ने मनोज को तीन साल के कारावास के दंड का आदेश दिया है।
केनरा बैंक सिविल लाइंस एटा में यह चेक जमा किया गया। जो भुगतान के लिए भारतीय स्टेट बैंक पहुंचा तो पकड़ा गया। ये चेक जिला समाज कल्याण अधिकारी के खाते से 19 सितंबर 1992 को जारी किया था। स्टेट बैंक एटा के मुख्य शाखा प्रबंधक एसके दुबे ने कोतवाली नगर में दयानंद उमा विद्यालय औनेरा के कर्मचारी मनोज कुमार के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बताया कि 3 और 6 के बीच में शून्य कपटपूर्वक बढ़ाया हुआ प्रतीत हुआ। साथ ही अंग्रेजी में थ्री को थर्टी धोखाधड़ी की नीयत से किया जाना प्रतीत हुआ।
बैंक के साथ धोखाधड़ी की नीयत से भुगतान के लिए चेक प्रस्तुत किया है। दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने मनोज को दोषी ठहराया। बचाव पक्ष न भुगतान न होने का हवाला देते हुए न्यूनतम दंड देने की मांग की। अदालत ने मनोज को तीन वर्ष के साधारण कारावास और 5,000 रुपये अर्थदंड जमा करने का आदेश दिया है।