एटा। देवोत्थान एकादशी बृहस्पतिवार को है। मान्यता है कि इस दिन देव जागते हैं। इसके साथ ही मांगलिक व वैवाहिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं। इस बार देवोत्थान के दिन जिले में लगभग एक हजार युवा विवाह के बंधन में बंधेंगे। दिवाली के बाद अब देवोत्थान से बाजारों को कारोबारी उड़ान मिल रही है। लोग बाजारों में खरीदारी करने पहुंच रहे हैं। ऐसे में बंदी के दिन मंगलवार को भी बाजारों में खासी भीड़ देखने को मिली।
पं. गिरजेश पचौरी ने बताया कि देवोत्थान एकादशी अबूझ मुहूर्त होता है। इसमें सबसे अधिक विवाह आयोजन होते हैं। पूरे जिले में 1000 शादियां होने का अनुमान है। उधर, विवाह वाले घरों में कार्यक्रमों से संबंधित सामान की खरीदारी हो रही है। जिससे दिन भर बाजारों में भारी भीड़ दिखाई दे रही है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद की दुकानों के अलावा सबसे अधिक भीड़ कपड़ों, गहनों, बर्तन तथा श्रंगार के सामान की दुकानों पर दिखाई दे रही है।
बर्तन विक्रेता पवन कुमार ने बताया कि दरवाजे तथा विवाह में देने के लिए डिनर सेट व अन्य बर्तनों के सेट की मांग अधिक है। साड़ी विक्रेता प्रेमपाल ने बताया कि सहालगों के लिए शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र से भी लोग आ रहे हैं। महिलाएं विशेष रूप से बनारसी, ऑर्गेंजा तथा अन्य प्रकार की डिजाइनर साड़ियां पसंद कर रही हैं। 700 से लेकर 2500 रुपये तक की साड़ियां ज्यादा बिक रही हैं। रेडीमेड वस्त्र विक्रेता विकास जैन ने बताया कि विवाह में पहनने के लिए शेरवानी, कोट-पैंट तथा ब्लेजर की मांग ज्यादा है।
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फाइव पीस सूट व इंडो-वेस्टर्न की विशेष मांग
सहालग के इस सीजन में दूल्हा व उसके अन्य साथियों के लिए फाइव पीस सूट तथा इंडो-वैस्टर्न की विशेष मांग है। जिसको देखते हुए रेडीमेड वस्त्र विक्रेता उसी प्रकार के कपड़े मंगा रहे हैं। इसके अलावा बंद गले के कोट की भी डिमांड अधिक है। दुकानदार विपिन जैन ने बताया कि विवाह में होने वाले कार्यक्रमों के लिए कार्यक्रम के मुताबिक कपड़े खरीदे जा रहे हैं। हल्दी की रस्म में पीले रंग के कुर्ता-पाजामा भी खूब खरीदे जा रहे हैं। कीमत की बात करें तो ढाई से 15 हजार रुपये तक की कीमत के कपड़े सबसे ज्यादा खरीदे जा रहे हैं।
मध्यम वजन के खरीदे जा रहे गहने
सोने-चांदी की कीमतों में उछाल की वजह से लोग भारी छोड़कर मध्यम वजन के गहने खरीद रहे हैं। सराफा व्यापारी विश्वजीत सिंह चौहान ने बताया कि सोने व चांदी की कीमतों में तेजी की वजह से लोग ज्यादा वजनी गहने लेने से बच रहे हैं। वहीं ज्यादा हल्के गहने भी नहीं लेना चाह रहे हैं। मध्यम वजन के गहनों की बिक्री ज्यादा हो रही है।