जिले में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की प्रगति ब्रिज कॉर्पोरेशन की सुस्ती से लटका हुआ है। इसका सबसे ज्यादा असर कैनाल रूट बाईपास की परियोजना पर पड़ रहा है। बिना पुलों का कार्य हुए परियोजना पूरी नहीं हो सकती।
कैनाल रूट बाईपास पर चार पुल बनाए जाने हैं। एक पुल काली नदी पर झाल के पुल के समानांतर बनाया जाएगा। यह पुल 346 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा है, जिसके लिए 2931.62 लाख रुपये स्वीकृत है। दूसरा 446.61 लाख रुपये की लागत से 64 मीटर लंबा पुल काली नदी के एसकेप पर बनना है। दो अन्य पुल 71-71 मीटर लंबाई के पीएलजीसी और एलजीसी पटरी भगवंतपुर पर बनने हैं। इनकी लागत 910 लाख रुपये है।इन चारों पुलों पर कार्य शुरू नहीं हो सका है, जिससे कैनाल रूट बाईपास की परियोजना अधर में पड़ी है। जबकि यह परियोजना अखिलेश सरकार ने नगर के लोगों की समस्या को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराई थी। पुलों का बजट भी स्वीकृत हुआ, लेकिन विभाग ने पुलों के निर्माण को लेकर तत्परता नहीं दिखाई। जबकि बाईपास पर अर्थवर्क के अलावा गिट्टी बिछाए जाने का काम भी चल रहा है। बाईपास का निर्माण न होने के कारण लोगों को काफी दिक्कतें हो रहीं हैं।
वहीं काली नदी फोर लेन योजना में काली नदी पुल के समानांतर 649.75 लाख रुपये की लागत से 144 मीटर लंबा टू लेन का एक और पुल बनना है। पर, अब तक इसका कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है। इसी तरह बरबारा गंगा पुल का कार्य भी धीमा है। इसे दिसबंर तक पूरा होना है। पर, सुस्त रफ्तार के कारण समय से पुल बनकर तैयार होगा, इसकी उम्मीद कम है।
ब्रिज कॉर्पोरेशन के प्रोजेक्ट मैनेजर आरके सिंह का कहना है कि बरबार गंगा पुल पर काम तेजी से चल रहा है। 11 क्रेन लगाई गईं हैं। 53 कुओं पर काम चल रहा है। 12 स्लैब डाले जा चुके हैं। दावा किया कि दिसबंर तक पुल बनकर तैयार जाएगा। अन्य परियोजनाओं की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
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