एटा। नगर पालिका में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने में गोलमाल किया जा रहा है। ऑफलाइन बनाए गए कई प्रमाणपत्र पालिका के रिकॉर्ड मेें चढ़े ही नहीं हैं। प्रमाणपत्र पर जो नंबर दिए गए हैं, रिकॉर्ड में उन पर किसी अन्य के नाम प्रमाणपत्र जारी हुए हैं। इसे लेकर कुछ लोगों ने पालिका में शिकायत भी दर्ज करा दी है। जिसके बाद कर्मचारियों में बेचैनी की स्थिति बन गई है।
साल 2015 में नगर पालिका की ओर से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र ऑफलाइन बनाए जाते थे। उन प्रमाणपत्रों का बकायदा रिकॉर्ड तैयार किया जाता था। शिकायतकर्ता के मुताबिक कर्मचारी ने लोगों से रुपये लेकर फर्जी प्रमाणपत्र बनाना शुरू कर दिया। इसके लिए वह अलग से एक रजिस्टर मेंटेन करने लगे। बाद में उस रजिस्टर में चढ़े क्रमांक को नहीं बदल सके जिससे कई लोगों को जन्म प्रमाणपत्र फर्जी दे दिए गए।
वर्मा नगर के निवासी को दिया फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
नगर पालिका परिषद की ओर से एक मार्च 2015 को आशी पुत्री अंकित चौहान व शिल्पी सिंह को जन्म प्रमाणपत्र जारी किया गया। जब इस जन्म प्रमाणपत्र की पड़ताल की तो इससे संबंधित कोई भी लेखा जोखा रिकॉर्ड में नहीं मिला। नगर पालिका के अधिष्ठान लिपिक ईश्वरसरन ने सभी दस्तावेजों को खंगाला, इसके बावजूद भी वह नाम नहीं मिला।
ललित मोहन के नाम से निकला जन्म प्रमाणपत्र
फर्जी बनाए गए जन्म प्रमाणपत्र संख्या 847 की जांच पड़ताल की तो उसमें ललित मोहन व सुनीता के नाम से जन्म प्रमाणपत्र बनाया गया। यह प्रमाणपत्र भी उसी तिथि को बनाया गया जिस तिथि को फर्जी प्रमाणपत्र बनाया गया।