गर्मी दस्तक दे चुकी है और जिले की बीस लाख आबादी के लिए पेयजल का कोई इंतजाम नहीं है। आलम यह है कि शासन से बजट जारी नहीं होने के कारण जिले में दस प्रतिशत से ज्यादा हैंडपंपों के हलक सूखे पड़े हैं। एक तिहाई ओवरहेड बंद पड़े हैं। इसके अलावा वाटर एटीएम लगाने की योजना अधर में है। विधायक कोटे से मिलने से वाले नए हैंडपंप नहीं मिलने और बंद पड़े हैंडपंप को रीबोर कराने के लिए भी शासन से अभी तक बजट जारी नहीं हुआ है। ऐसे में इस बार गर्मी में पेयजल संकट गहराता दिखाई दे रहा है।
जिले में 29680 हैंडपंप में से लगभग 3000 से अधिक हैंडपंप खराब हैं। 61 ओवरहेड में से सात पानी की टंकी का मेंटीनेंस नहीं होने के कारण बंद है, जबकि 13 टंकियाें की मियाद खत्म हो चुकी है। सांसद आदर्श योजना में पिलखरा और अमरोली रतनपुर में वर्ष 2015 से दो पानी की टंकी स्वीकृत पड़ी हैं, लेकिन निर्माण के लिए बजट आवंटित नहीं हुआ। जिले के 15 स्थलों पर लगने वाले वाटर एटीएम की योजना अधर में है और तो और विधायक कोटे से 400 नए हैंडपंप नहीं मिलने के अलावा 400 पुराने हैंडपंप को रीबोर कराने के लिए अभी तक शासन ने बजट जारी नहीं किया है। जल निगम के अधिशासी अभियंता अवनेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि गर्मी सीजन शुरू होने से पहले शासन को प्रस्ताव भेज कर बजट मांगा था, लेकिन शासन से फूटी कौड़ी नहीं मिली। इसके चलते इस बार जिले के लोगों को गर्मी के सीजन में पेयजल समस्या का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। बजट जारी भी हुआ तो गर्मी का आधा सीजन पानी किल्लत के बीच गुजरेगा।
निगम के स्टॉक में 200 नए हैंडपंप
जल निगम के पास वर्कशॉप में 200 हैंडपंप स्टॉक में हैं। लेकिन उन्हें लगाने की स्वीकृति अभी तक नहीं मिली है। स्टॉक में पड़ा माल किसी योजना का नहीं है, लेकिन यदि जन प्रतिनिधि शासन से स्वीकृत लेते हैं तो उन हैंडपंप को तुरंत लगाकर पेयजल व्यवस्था की जा सकती है। लेकिन जिले के किसी जनप्रतिनिधि से जनता की सुध नहीं ली है।
चालू ओवरहैड के संचालन की समस्या
ग्राम पंचायतों को हैंडओवर हो चुकी पानी की टंकी के संचालन की समस्या बरकरार है। संचालन के लिए बजट नहीं होने के कारण उनका समय पर संचालन नहीं हो पा रहा। एक्सईएन जलनिगम का कहना है कि कई तो चालू पानी की टंकी इसी समस्या से जूझ रहीं है। आलम यह है कि एक गांव की पानी की टंकी से कई गांवों को पेयजल आपूर्ति हो रही है।