बड़े नोट बंद होने के चौथे दिन भी बैंकों में पुराने नोट बदलने और जमा करने के लिए कतारें दिखाई दीं। इसे देखकर लोगों का दम फूल रहा है। इसके बाद भी परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इस दौरान एटीएम दिन में भी नहीं खुले। उधर, जवाहर नवोदय विद्यालय की रसोई के लिए आपूर्तिकर्ता सब्जी भेजने में आनाकानी कर रहा है। निजी और सरकारी निर्माण कार्यों में लगे मजदूर काम छोड़ बैंक की लाइन मेें लगे हैं। इससे निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी परेशानी तो इमरजेंसी में भी नहीं हुई थी। ।
मोदी सरकार के फैसले का जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है, हालात बिगड़ रहे हैं। शनिवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के एटीएम मशीन चालू होने में दो से तीन सप्ताह का वक्त लगने के बयान से लोग परेशान हैं। व्यापारियाें और कारोबारियों का कहना है कि मोदी सरकार और आरबीआई का कैश डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट फेल होने से हालत इमरजेंसी से भी खराब हो चले हैं। खातों में लाखों रुपये और सब्जी खरीदने के लिए 100, 50, 20, 10 रुपये का नोट नहीं है। दो हजार रुपये का नोट मिलने के बाद अब बाजार में ग्राहक को देने के लिए छोटे नोट नहीं हैं। सरकारी कर्मचारी से लेकर किसान, महिलाएं, युवक, युवतियां बैंक और डाकघरों के बाहर लाइन में लगे हैं। जवाहर नवोदय विद्यालय के प्रिंसिपल की मानें तो 550 छात्रों के लिए सब्जी और दूध आपूर्ति की बमुश्किल हो रही है। वहीं, कारोबारी और व्यापारी ग्राहक नहीं आने के चलते बाजार में हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
-------------------------
जैथरा में 50 रुपये में बिक रहा पहचान पत्र
कांशीराम कालोनी में 50 रुपये का भुगतान कर पहचान पत्र और आधार कार्ड एकत्र कराए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र का एक ग्राम प्रधान आवास का दोबारा आवंटन कराने के नाम पर आवास के लोगों के पहचानपत्र और आधार की फोटो कॉपी एकत्र करा रहा है। ताकि इलाके के एक धनकुबेर का काला धन सफेद करने के काम आ सकें। शिकायत पर एडीएम प्रशासन सतीश पाल ने मामले की जांच एसडीएम अलीगंज और नगर पंचायत ईओ को सौंप दी है।
----------------------
पुलिस की मदद से मिले इलाज का पैसा
राजा का रामपुर थाना अंतर्गत बिल्सड़ निवासी हरिओम की मां सावित्री देवी बीमार थी। वह मां को लेकर फर्रुखाबाद गया, लेकर छोटे नोट नही होने के कारण चिकित्सक ने बिना उपचार के लौटा दिया। इसके बाद हरिओम जैथरा की एसबीआई शाखा पहुंचा और दो घंटे तक लाइन में लगने के बाद भी रुपये नहीं मिले। इसी बीच व्यवस्था देखने आए एसओ जैथरा कैलाश चंद्र दुबे को देख हरिओम ने रोते हुए मां की जान बचाने के लिए गुहार लगाई। इस पर एसओ ने बैंक मैनेजर से मिलकर रुपये बदल कर मां के इलाज के लिए मदद की।