बंदरों का उत्पात जानलेवा हो गया है। जनपद के दर्जन भर नगर, कसबा, शहर में इनका उत्पात बढ़ रहा है। दिन भर झुंड में लोगों पर हमला कर नुकसान कर रहे हैं। कुछ दिन पहले एक व्यक्ति की छत से गिरने पर मौत हो गई थी। रोडवेज विभाग ने तो लंगूर बांध लिए हैं जिससे बंदर डरते हैं।
जनपद में बंदरों का कहर बढ़ता जा रहा है। आए दिन बंदर के अटैक से वाली घटनाओं में लोग घायल हो रहे हैं। मिरहची में हाल ही में बंदर के हमले से एक मासूम की मौत हो गई। वहीं एक साल पहले अलीगंज कस्बा में एक व्यक्ति की बंदर के हमले से छत से गिरकर मौत हो गई थी। पीड़ित जिला प्रशासन से इनसे मुक्ति की मांग कर रहे हैं। हालांकि शनिवार को मथुरा से आई टीम ने कई इलाकों में बंदरों को पकड़ने का काम भी शुरू किया था। अवागढ़, जलेसर, मिरहची, मारहरा, एटा, अलीगंज, राजा का रामपुर आदि स्थानों पर बंदरों का प्रकोप सबसे ज्यादा है। दूसरी ओर रोडवेज विभाग ने वर्कशॉप में बंदरों के उत्पात के चलते लंगूर किराए पर ले रखा है। क्योंकि यह बंदर बसों के अंदर घुसकर सीट फाड़कर नुकसान पहुंचा रहे हैं।
कालोनी में बढ़े बंदरों के आतंक के बाद सात हजार रुपये महीने पर एक लंगूर किराए पर मंगाया गया था। साथ ही इसकी डायट का खर्च भी उठाना पड़ा, लेकिन बंदर महीनों तक कालोनी में नहीं आए।
-आलोक जैन, सचिव, पुरुषार्थी आवासीय समिति
बंदरों के आतंक से बैठना तक मुश्किल है। छतों पर रहने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बंदर खाने का सामान, कपड़े, बरतन, जूते-चप्पल तक उठा ले जाते हैं।
- वीरेंद्र शर्मा, अलीगंज
जनपद में वाइल्ड लाइफ यूनिट न होने के चलते बंदरों के अन्मूलन की कोई योजना और प्रस्ताव नहीं हैं। वन विभाग तो सूचना पर संबंधित के व्यय पर कार्रवाई करता है।
सत्य प्रकाश शर्मा, वनाधिकारी
अभी तक पकड़े तीन सौ बंदर
मिरहची के गांव जिन्हैरा में आठ जनवरी को सात माह की मासूम मंशिता की मौत के बाद गांव के लोगोें ने प्रत्येक घर से दो-दो सौ रुपये एकत्रित कर मथुरा के छाता से बंदर पकड़ने वाली टीम को बुलाया है, जिसने अब तक 300 बंदर पकड़कर पिंजरे में डाल दिए हैं। वहीं शेष बंदरों को पकड़ने का काम जारी है।