क्षेत्र के गांव चकरा में बुधवार की रात्रि नामजद हत्यारों ने ताबड़तोड़ गोलियां दाग कर घर के बाहर घेर में सो रहे बाबा और पौत्र को मौत के घाट उतार दिया। मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। ग्रामीणों के एकत्रित होने पर आरोपी फायरिंग करते हुए भाग गए। दोहरे हत्याकांड से गांव में सनसनी फैल गई। पुलिस ने दोनों शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिए। पांच हत्यारोपियों के खिलाफ घटना की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
घटना बुधवार की रात्रि करीब एक बजे की है। साधू सिंह (60) एवं उनका पौत्र नीरज (12) पुत्र नरेश कुमार एवं नैनसुख (साधू सिंह का मित्र) सो रहे थे। रात्रि को हमलावरों ने सोते समय चादर उठाकर साधू सिंह एवं नीरज (पौत्र) को चिह्नित किया और ताबड़तोड़ गोलियां दाग दीं। साधू सिंह के एक गोली गर्दन पर लगी, एक सिर में और कंधे पर। जबकि नीरज की गर्दन में हत्यारे ने गोली मारी। दोनों मौके पर ही मौत का शिकार हो गए। जबकि नैनसुख को हत्यारों ने छोड़ दिया। रात्रि के समय अचानक फायरिंग की आवाजें सुनकर परिवारीजन एवं गांव के लोग एकत्रित होने लगे। हत्यारे फायरिंग करते हुए फरार हो गए।
बताया गया कि साधू सिंह का 9 बीघा जमीन को लेकर अपने चचेरे भाई लीलाधर से चल रहा था। इसी रंजिश के चलते लीलाधर ने बलवंत उर्फ खलीफा, सतीश, अजब सिंह, विजय सिंह ने योजना बना कर हत्या की वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों को नामजद करते हुए साधू सिंह के पुत्र नरेश कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस अधीक्षक विनय कुमार यादव, सीओ अमृतलाल एवं थाना प्रभारी ने मौके का निरीक्षण किया।
होली पर भी हुआ था साधू से विवाद
हत्या के शिकार हुए साधू सिंह का विवाद लीलाधर से हुआ था। दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस मारपीट के पीछे फर्जी बैनामे को लेकर विवाद था।
बालक नीरज का क्या कसूर
इस दोहरे हत्याकांड में 12 वर्षीय नीरज को हत्या का शिकार बनाया गया। नीरज की हत्या को लेकर ग्रामीणों के बीच यही चर्चा थी कि आखिर आठवीं क्लास में पढ़ने वाले बालक नीरज को हत्या का शिकार क्यों बनाया। बालक का रंजिश से मतलब था।
साूध के पुत्र पर भी झोंका था फायर
साधू सिंह की हत्या के बाद फायरिंग की आवाज सुनकर जब परिवरीजन एवं ग्रामीण दौड़कर आए तो तभी आरोपियों ने साधू सिंह के पुत्र नरेश की ओर भी फायर किया, लेकिन वह बाल बाल बच गया।
फोटो 30- सहावर क्षेत्र में दोहरे हत्याकांड के बाद शोकाकुल परिवारीजन।
फोटो 31- सहावर क्षेत्र में दोहरे हत्याकांड के बाद शोकाकुल परिवारीजन।