इलाज के इंतजार में बीमार, बैंकों की कतार में तीमारदार
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नोटबंदी की मार ने बीमारों की समस्याएं और बढ़ा दी हैं। लोग अस्पतालों में इलाज के लिए इंतजार में प़ड़े हैं। वहीं तीमारदार बैंक-दर बैंक भटक रहे हैं। नकदी के अभाव में उन्हें इलाज के लिए पर्याप्त धन नहीं मिल पा रहा है।
सरकारी अस्पतालों की स्थिति जगजाहिर हैं। न तो पर्याप्त दवाएं हैं और न ही चिकित्सक। इससे लोग निजी चिकित्सालय में इलाज कराने के लिए जाने को मजबूर हैं। पर, वहां पांच सौ और 1000 रुपये के नोट नहीं लिए जा रहे हैं। इससे बीमारों को दवा, इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
उनके परिवारीजन बैंकों की लंबी कतारों में लगे हैं। इसके बाद भी हाथ में इलाज के लिए पर्याप्त रूपये नहीं मिल पा रहे हैं। कई बैंकों में तो कैश खत्म के चलते उनकी दिक्कतें और बढ़ रही हैं। गांव खितौली निवासी फारूख खां, मोहल्ला झंडापीर निवासी मुनीसा बेगम आदि बीमार होने के बाद भी इलाज नहीं करा पा रही हैं।
गांव खितौली निवासी वृद्धा बिटोला देवी (80) ने बताया कि वह बुखार से पीड़ित है । दवा के लिए खाते से पैसा निकालने के लिए एक सप्ताह से बैंक की लाइनों में लगती हैं। पर, पैसा नहीं मिल पा रहा है।