गल्ला मंडी में कारोबारियों की हड़ताल से सन्नाटा
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गल्ला कारोबारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। गुरुवार को मंडी में जो कारोबारी पहुुंचे वो प्रदर्शन कर लौट आए। मंडी सचिव ने हड़ताली कारोबारियों से हड़ताल समाप्त करने के लिए वार्ता की लेकिन नगदी का इंतजाम न होने तक कारोबारियों ने हड़ताल न खोलने की बात कही।
गौरतलब है कि नोट बंदी के आदेश के बाद से ही गल्ला मंडी का कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया है। क्योंकि गल्ला मंडी में हर रोज डेढ़ से दो करोड़ की नकदी की जरूरत होती है। नकद मूल्य पर किसानों का गल्ला खरीदा जाता है। मंडी में इस समय मक्का, बाजरा, धान, गेहूं, सरसों, मूंग, उड़द के जैसे कई जिनसों के आवक का समय है लेकिन पैसा न मिलने से किसान भी मंडी नहीं पहुंच रहे। जरूरतमंद किसान मंडी पहुुंचते थे उन्हें नकद भुगतान नहीं हो पा रहा था।
हड़ताली कारोबारियों ने गुरुवार को मंडी में प्रदर्शन किया। व्यापारी का कहना था कि जब तक नगदी की समस्या का हल नहीं होगा तब तक मंडी का संचालन संभव नहीं है। गल्ला मंडी के अध्यक्ष मुकेश बंसल ने कहा किसान चेक से भुगतान लेने को तैयार नहीं हैं बैंकों से नकदी मिल नहीं रही ऐसी स्थिति में कारोबार कैसे हो। कारोबारी सुनील गुप्ता ने कहा कि सरकार ने जल्दबाजी में नोट बंदी का फसला लेकर कारोबारियों के सामने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है।
मंडी सचिव नवनीत यादव ने व्यापारियों से हड़ताल खोलने की अपील की । उन्होंने कहा मंडी निर्देशक के जरिए बैंकों को पत्र जारी किया जाएगा लेकिन कारोबारी इस बात से सहमत नहीं हुए। इस दौरान शिशु पाल, बहादुर सिंह, सत्यपाल, अशोक माहेश्वरी, विनय माहेश्वरी, किशन चंद्र शर्मा, एसबी सिंह, केशव गुप्ता, निरूत्तम सिंह आदि मौजूद रहे।