एटा। अखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले सोमवार को कलेक्ट्रेट पर आशा कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। मानदेय के स्थान पर वेतन और सामाजिक सुरक्षा सहित अन्य मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व मुख्यमंत्री को भेजा।
धरने के दौरान जिलाध्यक्ष मीरा यादव ने कहा कि आशा कार्यकर्ता वर्षों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनकर कार्य कर रही हैं। गर्भवती महिलाओं के प्रसव, शिशु टीकाकरण, परिवार नियोजन, स्वच्छता और जनजागरूकता जैसे दायित्वों को निष्ठा से निभा रही हैं लेकिन उनके योगदान के अनुपात में उन्हें आज तक न तो उचित मानदेय मिला है और न ही सामाजिक सुरक्षा का लाभ। कहा कि प्रोत्साहन राशि के बजाय नियमित वेतन दिया जाए। कार्यकर्ता को 18000, संगिनी को 24000 तथा बीटीटी, कोऑर्डिनेटर को 30000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाए। इसके अलावा ईपीएफ, ईएसआई व पेंशन की सुविधा प्रदान करने, कार्य के दौरान दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में 5 लाख का मुआवजा देने व सेवानिवृत्ति पर 10 लाख की एकमुश्त राशि प्रदान करने की भी मांग की।
कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को पदोन्नति का अवसर दिए जाने, यूनिफॉर्म भत्ता, यात्रा भत्ता, मातृत्व अवकाश, अस्पतालों में विश्राम स्थल की सुविधा तथा कार्य सुचारू रूप से करने के लिए मोबाइल या टैबलेट उपलब्ध कराया जाए। ज्ञापन लेने पहुंचे डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन देने के लिए आशाएं राजी नहीं हुईं। काफी देर बाद वहां पहुंचे डीएम प्रेम रंजन सिंह को आशाओं ने ज्ञापन सौंपा। इस दौरान एसएसपी श्याम नारायण सिंह भी मौजूद रहे। धरना में विनीता देवी, अंजू, रंजना सिंह, सुनीता देवी, अर्चना देवी, प्रेमलता, सारिका देवी, रजनी देवी, अर्चना कुशवाह आदि आशा कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।