जिले के युवाओं की स्वरोजगार की आस अधूरी ही रह गई। साल भर में स्वरोजगार योजनाओं के तहत 37 आवेदन लंबित पड़े है। अब 15 मार्च तक ऋण वितरण होना है, ताकि लाभार्थियों को जिला उद्योग विभाग सब्सिडी का भुगतान कर सके, लेकिन बैंकर्स अब भी सुस्त तरीके से काम करने में लगे हैं।
जिले में युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए दो योजनाएं संचालित हैं, लेकिन बैंकों की मनमानी युवाओं की राह में बाधा बनी हुई है। प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना की बात करें तो जिले को योजना के तहत 47 लाभार्थियों का लक्ष्य मिला। लक्ष्य के मुताबिक जिला उद्योग केंद्र की ओर से 47 आवेदन बैंकों को ऋण के लिए भेजे गए। पहले आवेदन लंबित रहे, जब केंद्र की ओर से दबाव पड़ा तो 15 आवेदन स्वीकृत कर 18 आवेदन वापस कर दिए गए और 17 आवेदन आज भी पेंडिंग हैं। आवेदन स्वीकृत होने के बाद युवाओं को लगा थी कि अब उनको ऋण भुगतान हो जाएगा, लेकिन बैंक भुगतान करने में असमर्थ रहीं और युवा निराश हो गए।
समाजवादी स्वरोजगार योजना का आलम भी ऐसा ही रहा। योजना के 64 आवेदनों के सापेक्ष 26 आवेदन स्वीकृत हुए और 18 वापस कर दिए। बैंक 26 में से महज 20 आवेदकों को ही ऋण का भुगतान कर सकीं। अब 15 मार्च को योजनाओं की अंतिम तिथि है। अगर 15 मार्च से पहले लंबित आवेदनों और स्वीकृत ऋणों का भुगतान हो जाता है, तो राहत मिलेगी। उद्योग केंद्र सब्सिडी का भुगतान कर सकेगा। उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र सुधीर यादव ने कहा बैंकों की ढिलाई के चलते ऋण आवेदन लंबित पड़े हैं। लंबित आवेदन 15 मार्च से पहले पूरे कर दिए जाएं।
बेतुके कारण बताकर वापस किए जा रहे आवेदन
बैंकों ने स्वरोजगार योजनाओं के संचालन में रुचि नहीं दिखाई। 36 आवेदनों को बेतुके कारण बताकर बैंकों ने वापस कर दिया। जबकि आवेदनों की फाइल उद्योग केंद्र अभ्यर्थी का साक्षात्कार लेने के बाद ही बैंकों को भेजता है।
कहते हैं युवा
प्रेम सिंह ने बताया कि उन्होंने समाजवादी योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन बैंक ने आवेदन को बिना ठोस कारण बताए वापस कर दिया। अंशुल कुमार ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री योजना के तहत आवेदन किया था, जो आज भी बैंक में लंबित है।