खाद्य सुरक्षा के प्रति सरकार भले ही गंभीरता दिखा रही हो, लेकिन इस योजना के लाभ को लेने के प्रति लोगों की चिंता बढ़ती जा रही हैं। सरकार ने तैयार किए गए प्रारूप में ऐसे नियम और शर्तों को रखा है जिससे योजना का लाभ लेने के लिए लोगों को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ेगा।
सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा के लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सर्वे के अलग-अलग प्रारूप तैयार किए गए हैं। जहां ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर, हारवेस्टर, शस्त्र लाइसेंस के अलावा पांच केवीए जेनरेटर रखने वाले इस योजना के लाभ के हकदार नहीं होंगे, वहीं शहरी क्षेत्र में सौ वर्ग मीटर से अधिक स्व अर्जित आवासीय प्लाट या उस पर स्वनिर्मित मकान वाले भी इस योजना से वंचित हो जाएंगे। गरीबों के लिए राहत की खबर यह है कि 19 हजार वार्षिक आय वाले ग्रामीण एवं 24 हजार वार्षिक आय वाले शहरी इस योजना में शामिल होंगे जिनकी सीमा बढ़ाकर दो लाख कर दी गई है। बता दें कि 65 फीसदी शहरी एवं 80 फीसदी ग्रामीण खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ के हकदार होंगे।
इस योजना के तहत तीन किलो गेहूं व दो किलो चावल परिवार के प्रत्येक सदस्य को मिलेगा। गेहूं की कीमत दो रुपये किलो व चावल की कीमत तीन रुपये किलो होगी।
-अनूप तिवारी, जिला पूर्ति अधिकारी एटा।