एटा। पड़ोसी जनपदों में कोरोना के केस सामने आने के बाद भी जिले में इसके प्रति लापरवाही बरती जा रही है। यहां मेडिकल कॉलेज में पहुंचने वाले मरीजों की जांच तक नहीं की जा रही है। उन्हें इधर-उधर टरका दिया जाता है। ऐसा ही मामला शनिवार देखने को मिला। जहां एक मरीज इमरजेंसी से लेकर एमसीएच विंग तक भटकता रहा। करीब दो घंटे भटकने के बाद उसकी जांच के लिए सैंपल लिया गया।
शीतलपुर निवासी धर्मेंद्र को लेकर परिजन शनिवार सुबह करीब 10 बजे डायलिसिस के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जहां डायलिसिस प्रभारी ने पहले कोरोना की जांच कराने को कहा। इस पर धर्मेंद्र परिजन के साथ पहले एमसीएच विंग में बनी पैथोलॉजी गए। वहां सैंपल लेने से मना कर दिया गया और उन्हें कोरोना की जांच के सैंपल को प्रांगण में बनी बीएस पैथोलॉजी लैब भेज दिया गया। लेकिन यहां कर्मचारी ने कह दिया कि सैंपल यहां नहीं लिए जाते हैं।
इस पर वह इमरजेंसी में गए। वहां से फिर एमसीएच विंग की पैथोलॉजी में भेजा गया। जहां कर्मी द्वारा किसी से कॉल पर आरटीपीसीआर सैंपल के लिए बात कही गई। कर्मी ने मरीज से कहा 15 मिनट बाद सैंपल हो पाएगा। यहां सामान नहीं है, आ रहा है। करीब 20 मिनट बाद दोपहर 12 बजे मरीज का सैंपल हो पाया। लैब टेक्नीशियन विजेंद्र कुमार ने बताया यहां चिकित्सक द्वारा जांच को जब पर्चे पर लिखा जाता है। उसी मरीज की जांच की जाती है। पैथोलॉजी में एंटीजन किट की जांच के लिए कार्ड उपलब्ध हैं। मरीज का सैंपल आरटीपीसीआर जांच के लिए ले लिया गया है।