संवाद न्यूज एजेंसी।मिरहची। विद्यार्थियों में बचपन से ही खेल प्रतिभा निखारने के लिए स्कूलों में खेल मैदान बनाए जाते हैं। लेकिन क्षेत्र के कई स्कूलों में खेल मैदान नहीं हैं। इसके बाद भी विद्यार्थियों से क्रीड़ा शुल्क के नाम पर लगातार वसूली की जा रही है।
बच्चों से ली जा रही इस धनराशि का उपयोग कहां होता है, इसका जवाब देने में स्कूलों के प्रबंधक-प्रधानाचार्य पल्ला झाड़ लेते हैं। कुछ का कहना है कि इसका उपयोग समय-समय पर ब्लॉक स्तरीय, जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं कराने में किया जाता है। उनके इस जवाब के आगे भी सवाल है कि जब उनके स्कूलों में खेल मैदान ही नहीं, अभ्यास भी नहीं तो ब्लॉक या जिला स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग कौन करेगा? बीएसए संजय सिंह ने बताया कि स्कूलों में खेल मैदान और प्रतियोगिताएं होनी चाहिए। पता किया जाएगा कि बिना खेल मैदान शुल्क कैसे लिया जा रहा है।
नहीं निखर पा रहीं प्रतिभा
प्राइवेट के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में भी खेलकूद को बढ़ावा न दिए जाने के चलते बच्चों में खेल प्रतिभा नहीं निखर पा रही। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की संख्या बहुत कम रहती है।