शहर के बाजार में दुकान से नमूना लेती खाद्य विभाग की टीम। संवाद
एटा। होली के त्योहार से पूर्व बाजारों में मिलवटी मावा बेचने का खेल तेज हो गया है। मिलावटखोर मैदा, आलू, रिफाइंड तेल, सोडा और मिल्क पाउडर मिलाकर मावा तैयार कर रहे हैं। बढ़ती मांग का फायदा उठाकर बाजार में धड़ल्ले से इसे खपाया जा रहा है। डाक्टरों की मानें तो मावा सेहत बिगाड़ सकता है।
खाद्य विभाग भले ही छापेमारी का दावा कर रहा हाे, लेकिन बाजार में इसकी खूब खपत हो रही है। त्योहारों पर घरों में बनने वाले पकवानों के लिए लोग अधिकतर मावा खरीदते हैं। जानकारों की मानें तो मावे में आलू, मैदा और रिफाइंड, मिल्क पाउडर की मिलावट की जा रही है। यह मावा बमुश्किल 100 रुपये में तैयार हो जाती है। जबकि इसकी बिक्री 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक होती है। इससे मिलावटखोरों को मोटा मुनाफा हो रहा है।
ऐसे करें पहचान
मुख्य खाद्य अधिकारी कमलेश त्रिपाठी की मानें तो मावा की शुद्धता परखने के लिए उसमें आयोडीन टिंचर की एक–दो बूंदें मावा पर डालकर जांच सकते हैं। यदि मावा नीला पड़ जाता है तो समझें कि वह पूरी तरह नकली है और सेहत के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है। उन्होंने अपील की है कि त्योहार के दौरान किसी भी तरह की मिलावटी खाद्य सामग्री मिलने पर इसकी तुरंत शिकायत विभाग को दें ताकि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
अब तक 8 नमूने लिए, 686 किलो तेल सीज
होली पर्व को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में छापेमारी अभियान चलाया है। अभियान के दौरान टीम ने विभिन्न प्रतिष्ठानों से कुल 8 नमूने संग्रहित किए। वहीं मिलावटी व संदिग्ध सामग्री मिलने पर विभाग ने 686 किलो तेल जिसकी कीमत करीब 70,554 रुपये है सीज कर दिया। जांच के दौरान बाजार में रखी 46 किलो दूषित मिठाई मौके पर ही नष्ट कराई गई। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि त्योहारों के समय मिलावटखोरी की आशंका बढ़ जाती है इसलिए सख्ती के साथ निरीक्षण किया जा रहा है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश त्रिपाठी ने बताया कि लिए गए नमूनों को जांच हेतु लैब भेजा गया है। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने व्यापारियों को साफ-सफाई व मानक गुणवत्ता का पालन करने की हिदायत दी है।
गत वर्ष लिए 40 में से 25 नमूने फेल
होली पर्व के दौरान मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए पिछले वर्ष खाद्य विभाग ने विशेष अभियान चलाया था। अभियान के तहत विभाग की टीम ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में छापेमारी कर 40 नमूने जांच के लिए संग्रहित किए थे। निरीक्षण के दौरान टीम ने 171 किलो सरसों का तेल संदिग्ध गुणवत्ता पाए जाने पर मौके पर ही सीज कर लिया था। सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया जहां से आई रिपोर्ट में 25 नमूने फेल घोषित हुए थे।