आशाओं ने मंगलवार को अधिकारियों को निराश कर दिया। शहर के अतिथि निवास में आयोजित सम्मेलन का आशा कार्यकर्ताओं ने बहिष्कार कर दिया। सम्मेलन के दौरान आशाओं ने मांगाें को लेकर प्रदर्शन किया। साथ ही मांगे पूरी न होने पर काम बंद करने की चेतावनी दी। सीएमओ ने आशाओं को समझा-बुझाकर शांत कराया। आशाओं ने जिलाधिकारी के सामने भी अपनी पीड़ा बयां की।
मंगलवार को आयोजित आशा सम्मेलन में प्रोत्साहन पर कार्य कर रही आशा वर्कर्स को सम्मानित किया जाना था। कार्यक्रम में सीएमओ डा. आरसी पांडेय, राज्य महिला आयोग की सदस्या अशोक पांडेय समेत तमाम अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान जिले में कार्य कर रही 1015 आशाओं ने कार्यक्रम में शिरकत की, लेकिन सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया। आशाओं का कहना था कि उनको मासिक तौर पर मानदेय या वेतन दिया जाए। ड्यूटी का समय निश्चित किया जाए। आशाओं को स्वास्थ्य विभाग के अलावा किसी अन्य विभाग का कार्य न सौंपा जाए। आशाओं ने सम्मेलन में 20 हजार रुपये दिए जाने की मांग की। सम्मेलन में विरोध को देखते हुए अधिकारियों ने आशाओं को समझाया। इसके बाद आशाओं ने डीएम आवास पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने डीएम अजय यादव को मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। डीएम ने जल्द ही आशाओं को मांगे पूरी करने का आश्वासन दिया। सुषमा, गिरिजा, सर्वेश, नीरज, राजकुमारी, मीरा, रीना, ममता, चित्रा, मंजू, पुष्पा समेत तमाम आशाएं मौजूद रहीं।
मानदेय की मांग को लेकर आशाओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 30 अगस्त को जिला महिला अस्पताल में आशा बहुुओं ने सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी की है। जिसे यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष बालिंदर कटियार संबोधित करेंगी। यूनियन की जिला सदस्य पुष्पा ने सभी आशा कार्यकर्ताओं से सुबह 10 बजे सम्मेलन में भाग लेने की अपील की है।
एटा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 753 आशाओं के पंजीकरण किए गए। राज्य महिला आयोग सदस्य अशोक पांडेय ने आशाओं को संबोधित किया। साथ ही सीएमओ डा. आरसी पांडेय ने प्रत्येक ब्लॉक की तीन-तीन आशाओं को सम्मानित किया। इस मौके पर एसीएमओ डा. एसएस पांडेय, डा. भगवानदास भिरौरिया, डा. पीके शर्मा, डा. प्रेमपाल सिंह, डा. जुबैर खान, संजय सिहौरिया मौजूद रहीं।