रंगों की धूम व मौज मस्ती के साथ होली का त्योहार आज मनाया जाएगा। बाजारों में रंग, पिचकारी, कपड़ों की दुकानों पर बच्चों की भीड़ थी वहीं किराना की दुकानों पर महिलाएं मेहमानों के लिए लजीज पकवान बनाने को खरीदारी करती दिखाई दीं। जिले में बुधवार शाम रंग पर्व होली का पूजन 1821 स्थानों पर हुआ। पर्व के कारण पूरे दिन बाजारों में भीड़ दिखाई दी। भारी भीड़ के कारण हाईवे पर वाहनों की लाइन लगने से जाम भी लगा रहा। लोग बाजारों में कलर, गुलाल, मिठाइयां और होली पूजन की सामग्री खरीदते रहे। वहीं होली दहन के बाद पड़ने वाले आखत के लिए लोग शहर के आसपास खेतों से गेहूं और जौ की बालियां उखाड़ते दिखाई दिए।
नगर पालिका क्षेत्र की सबसे बड़ी होली होली मोहल्ले में लगती है। होली के स्थान का सजाकर शाम को पूजन के वक्त डांस, मौज मस्ती और गुलाल उड़ाने के लिए लोगों ने डीजे बुक कराए गए हैं। परंपरा के मुताबिक होली को और बड़ा करने के लिए मंगलवार रात चंदा कर लकड़ियां खरीदने और जुटाने का काम मोहल्लों के युवक करते दिखाई दिए। वहीं घरों में महिलाएं गुजिया, मिठाई, पापड़, चिप्स बनाने की तैयारी करतीं रहीं। बुधवार को दिन में रंग पर्व होली को लेकर लोगों ने जमकर खरीदारी की। बुधवार को सबसे ज्यादा भीड़ पिचकारी, गुलाल, कलर बेचने वाली दुकानों पर दिखाई दी। आलम यह था कि बाजार में दिखाई देने वाले लोग गुलाल या रंग में रंगे दिखाई दिए। डीएम अजय यादव और एसएसपी अशोक त्रिपाठी ने जिले के लोगों को होली की बधाई देते हुए शांति एवं सौहार्द पूर्व वातावरण में रंग पर्व मनाने की अपील की है।
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यह हैं परंपराएं
शहर और ग्रामीण क्षेत्र में होली पर्व की अलग-अलग परंपरा हैं। शहरों में होली पूजन के बाद अगले दिन सुबह मोहल्ले के लोग अपने हिसाब से अलग समय पर आखत डालते हैं। इसके बाद होली की आग के आलू और शकरकंद भून कर खाए जाते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में सामूहिक रुप से होली के चारो ओर घूम कर होलिका के जयकारे लगाते हुए आखत डालने की परंपरा है। आखत डालने से पहले ग्रामीण होली की आग में गेहूं, जौ की बालियां भूनने के अलावा गन्ना भून कर जमीन पर पटकते हैं। और आखत डालने के बाद ग्रामीण शहरों की तरह होली की आग में आलू और शकरकंद भून कर खाते हैं।