अलीगंज। बार एसोसिएशन के कई दिनों से चल रहे विवाद को सुलझाने पहुंचीं एसडीएम और बार काउंसिल की सदस्य को विरोध का सामना करना पड़ा। कार्यवाहक अध्यक्ष व सचिव ने कहा कि अध्यक्ष पद पर किसकी तैनाती रहेगी इसका निर्णय लेने का अधिकार सदस्य का नहीं है। वहीं बैठक के बाद सचिव व पूर्व अध्यक्ष में विवाद हो गया। मामले को किसी तरह शांत कराया गया।
बार एसोसिएशन के विवाद को सोमवार को निपटाने पहुंचीं बार काउंसिल की सदस्य दरवेश सिंह तथा एसडीएम पीके सक्सेना ने वकीलों से जानकारी ली। वहीं पूर्व अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा ने अपने ऊपर हुई अवैधानिक कार्रवाई की जानकारी दी जिस पर एल्डर्स कमेटी के उपस्थित सदस्य प्रताप सिंह राठौर ने बताया कि वर्ष 2013 के ऑडिट में व्यवधान प्रमोद मिश्रा द्वारा डाला था। इसके कारण सदस्यों में उनके प्रति गुस्सा था। उन्हीं ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दिया जिसमें उनकी हार हुई थी। इस दौरान बाहर पूर्व अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा तथा सचिव शिवपाल सिंह में विवाद हो गया। किसी तरह दोनों को शांत किया गया। बार काउंसिल की सदस्य ने कहा पूर्व के अध्यक्ष को ही पद मिलना चाहिए। इस पर सचिव ने कहा कि ये निर्णय लेने का किसी को अधिकार नहीं है। राकेश चंद्र दीक्षित ही कार्यवाहक अध्यक्ष हैं। इस मौके पर बलवीर सिंह यादव, ओमहरि सक्सेना, प्रताप सिंह, केशव सिन्हा आदि मौजूद थे।
वहीं बार काउंसिल ऑफ उप्र की सदस्य के निर्णय से अधिवक्ता खफा हैं। वासुदेव सिंह शाक्य, पूर्व अध्यक्ष वीके अवस्थी, मेघसिंह का कहना है कि सदस्य बिना पूर्व सूचना के यहां आईं और एक तरफा निर्णय सुना दिया। इसका हम विरोध करते हैं उन्हें कोई अधिकार नहीं है जब तक उन्हें बार काउसिंल लिखित रुप से निर्देश न दे।
अधिवक्ताओं के बीच जो विवाद है वह बड़ा नहीं है केवल वर्ष 2013 के ऑडिट को लेकर है। वह अपने स्तर से दोबारा ऑडिट कराएंगी इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
दरवेश सिंह, बार काउंसिल की सदस्य