मिरहची। पीएचसी केंद्र मिरहची पर एक प्रसूता सुबह नौ बजे से पेड़ के नीचे शाम चार बजे तक प्रसव पीड़ा से कराहती रही। लेकिन केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डिप्टी सीएमओ राकेश कुमार को उस पर तरस नहीं आया। प्रसूता को लाने वाली आशा कमलेश कुमारी स्टाफ नर्स के सामने गिड़गिड़ाती रही, लेकिन उसे भी तरस नहीं आया। इस दौरान लोगाें की भीड़ एकत्रित हो गई। बाद में सीएमओ को जानकारी दी गई। उनके हस्तक्षेप के बाद शाम पांच बजे महिला को एटा रेफर किया गया। बताते हैं कि महिला की दो वर्ष पूर्व नसबंदी हो चुकी है।
मिरहची क्षेत्र के ग्राम रसूल पुर गढौली निवासी ममता देवी (32) पत्नी मूलचंद्र ने दो वर्ष पहले नसबंदी का आपरेशन एटा जिला अस्पताल में कराया था। उसके बाद भी वह गर्भवती हो गई। मंगलवार को ममता को प्रसव पीड़ा के दौरान दर्द उठा तो परिवारीजन उसे गांव की आशा के माध्यम से पीएचसी केंद्र पर मंगलवार की सुबह 10 बजे लेकर पहुंचे, जहां केंद्र पर तैनात स्टाफ नर्स देव कुमारी ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया। परिवारीजनों ने स्टाफ नर्स से एटा रेफर करने के लिए कहा तो स्टाफ नर्स ने बिना किसी रेफर लेटर के बिना उसे पीएचसी केंद्र से बाहर निकाला दिया। जब 10 बजे केंद्र प्रभारी व डिप्टी सीएमओ राकेश कुमार से परिवारीजनों ने शिकायत की तो उन्होंने भी कोई सुनवाई नहीं की। ममता अपने पति मूलचंद्र और आशा के साथ विकास खंड कार्यालय के बाहर कराहती रही। जब शाम तीन बजे लोग और मीडिया वाले जानकारी पर पहुंचे तो उन्होंने सीएमओ से इस समस्या से अवगत कराया तो उसके एक घंटे बाद प्रसूता को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया।
इस संबंध में जब प्रभारी चिकित्साधिकारी राकेश कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि दवाइयां और प्रसव से संबंधित अन्य सामान की जिले से सप्लाई नहीं मिलती है तो इसमें स्टाफ नर्स क्या अपने घर से खर्च करेगी। वहीं, सीएमओ डा. आरसी पांडेय ने कहा कि लापरवाह चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।