एटा। चार माह के लंबे इंतजार के बाद फिर से जनपद में शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। प्यारा भैया जहां घोड़ी पर चढ़ेगा, वहीं बेटी की डोली पिता के घर से विदा होगी। 24 नवंबर को देवोत्थान एकादशी से शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक जनपद भर मेें इस दिन 1000 के लगभग जोड़े शादी के बंधन में बंधेंगे। शहर में ही 100 के लगभग शादियां होंगी। इसके मद्देनजर शहर के सभी मैरिज हॉल बुक हो चुके हैं। स्कूल और खाली मैदान भी नहीं मिल रहे हैं।
एकादशी से लेकर 15 दिसंबर तक लगातार विवाह के मुहूर्त रहेगा। इस समय बाजारों में विवाह के लिए सामानों की खरीददारी जोरों पर चल रही है। दूल्हे राजा अपनी पसंद का सूट दर्जी से सिलवा रहे हैं, तो दुल्हन भी पीछे नहीं है। वह भी लहंगा चुन्नी का कलर पसंद करने में लगी हैं। लहंगा चुन्नी के रेट आठ हजार से लेकर चालीस हजार तक हैं। शादी में डीजे नहीं हो यह तो हो नहीं सकता। इसकी बुकिंग पहले से ही हो गई है। तीन हजार से लेकर छह हजार तक डीजे वालों के रेट चल रहे हैं। बैंड वाले भी तैयारियों में व्यस्त हैं। प्रतिदिन सुबह-शाम रिहर्सल कर रहे हैं। हलवाई भी पीछे नहीं हैं। दावत में क्या मीनू होना चाहिए और इसके क्या रेट हैं, इसकी लिस्ट बनाकर लड़का और लड़की वाले को थमा रहे हैं। जिस घर में शादी है। वहां शादी की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। घर की रंगाई-पुताई हो रही है तो शादी में किस-किस को बुलाना है। ऐसे लोगाें की लिस्ट तैयार की जा रही है। इस बार दूल्हा- दुल्हन के लिए जयमाला डालने के लिए घूमने वाली चेयर का चलन बढ़ा है। मंत्रोच्चारण के बजाय घंटे और घड़ियाल के बीच दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को वरमाला डालेंगे। इसके रेट ज्यादा हैं। सोने चांदी के आभूषणों की भी खरीददारी हो रही है।
क्या कहते हैं पंडितजी। शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित दुर्गेश कुमार शुक्ल ने बताया कि 24 नवंबर को देवता जगेंगे और इसी दिन से शादियों का सीजन शुरू हो जाएगा। यह शादियां 14 फरवरी तक चलेंगी, लेकिन बीच में एक महीने तक शादियों पर ब्रेक लग जाएगा, क्योंकि 16 दिसंबर से पूस का महीना शुरू हो रहा है, इसलिए 13 जनवरी तक शादियां नहीं होंगी। उन्होंने बताया कि उत्थान यानि उठना, देव यानि देवता इसलिए कहा जाता है देवोत्थान। इस दिन गन्ने के साए में भगवान को जगाया जाता है, गन्ना भगवान को प्रिय है।