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गरमाने लगी जनपद की सियासत

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एटा/मारहरा/अलीगंज। सहकारी समितियों के चुनावों के साथ ही जनपद की सहकारिता राजनीति गरमाने लगी है। समितियों पर वर्चस्व बनाने के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है। वहीं बड़े पदों के दावेदार जहां अपने पक्ष में लामबंदी करने में जुट गए हैं, वहीं पर्दे के पीछे से ही यह लोग अधिकतम समितियों पर वर्चस्व बनाने के लिए समर्थकों के पक्ष में गोटियां बिछा रहे हैं।
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सपा का गढ़ कहलाने वाले जनपद में हमेशा से सहकारिता चुनाव प्रतिष्ठापूर्ण रहे हैं। यहां सहकारिता राजनीति में पहले से स्थापित लोगों का वर्चस्व रहा है। इतना ही नहीं सहकारिता से पहले वे या तो स्वयं जनप्रतिनिधि रहे हैं या फिर सक्रिय राजनीतिक परिवार के सदस्य हैं। बताते चलें कि वर्षों तक सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे कैलाश यादव जहां पूर्व सांसद रहे हैं। वहीं बसपा शासन में अध्यक्ष बने शिव कुमार यादव दशकों से सहकारिता आंदोलन में सक्रिय रहे हैं। साथ ही वे पूर्व एमएलसी स्व.वीरी सिंह यादव के पुत्र हैं। इस बार भी ऐसी ही परंपरा फिर दोहराए जाने के हालात बन रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार की सहकारिता सियासत में वर्तमान जनप्रतिनिधियों की सक्रियता भी गुल खिला सकती है। दो पूर्व अध्यक्षों के अलावा दो विधायकों के परिजनों की सक्रियता कुछ ऐसे ही संकेत दे रही है। वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में पुरी सक्रियता दिखाने वाले एवं मुख्य पदों के प्रमुख दावेदार माने जाने वाले जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष कैलाश यादव एवं शिवकुमार यादव ने अभी से कुछ भी कहने को जल्दबाजी बताया।जांच में गलत मिलने पर निरस्त हुआ नामांकन। शनिवार को हुए नामांकन की रविवार को जांच में जहां अलीगंज ब्लाक के गढ़ी ककोड़ा में एक नामांकन गलत पाया गया। जिसे जांच के बाद निरस्त कर दिया गया। ऐसे में संबंधित वार्ड से दो प्रत्याशी ही रह गए हैं। एआर कोआपरेटिव नरेंद्र कुमार ने बताया कि करतला समिति से हुए नामांकन को लेकर एक आपत्ति मिली। गलत पाए जाने पर इसे निरस्त कर दिया गया। श्री कुमार ने बताया कि सोमवार को नाम वापसी का अंतिम दिन है। इसके साथ ही प्रत्याशियों की स्थिति एवं मुकाबला तय हो जाएगा।
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