फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुद्दा : आज भी जिले में शैक्षिक सुविधाओं का टोटा

विज्ञापन
विज्ञापन
मुद्दा : आज भी जिले में शैक्षिक सुविधाओं का टोटा
विज्ञापन

जिले में विज्ञान, वाणिज्य व कृषि वर्ग की उच्च शिक्षा नहीं
135 महाविद्यालयों में एक राजकीय, दो एडिड कालेज
राजकीय विद्यालयों में 80 फीसदी पद रिक्त
अमर उजाला ब्यूरो
एटा। दशकों बाद भी जिले की शैक्षिक व्यवस्थाएं अधूरी हैं। चार लाख से अधिक छात्र-छात्राओं वाले जिले में विद्यार्थियों को प्रोत्साहन तो दूर मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं। चुनावी दिनों में गरमाने वाला यह मुद्दा बाद में ठंडा पड़ जाता है। ऐसे में सक्षम परिवार के बच्चे अन्य शहरों में शिक्षा लेते हैं वहीं निर्धन बच्चे मन मानकर रह जाते हैं। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते जिले से जाने वाले विकास प्रस्ताव स्वीकृति के अभाव में दम तोड़ देते हैं। प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक की बदहाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले के सौ से अधिक परिषदीय विद्यालयों में बाउंड्री, पेजयल, शौचालय नहीं हैं। वहीं पांच सौ से अधिक विद्यालयों में हेडमास्टर नहीं हैं। शिक्षा की इन अधूरी व्यवस्थाओं के मुद्दों पर शहर के अलग अलग वर्ग के लोगों से चर्चा की गई। पेश है विजय मिश्रा की रिपोर्ट...
स्थान - इंद्रप्रस्थ होटल
समय - 1 बजकर 30 मिनट
कैसे हो पढ़ाई व अनुशासन!
जिले के सैकड़ों परिषदीय स्कूल शिक्षक-प्रधानाध्यापकों की कमी से जूझ रहे हैं। शिक्षक नेता राकेश चौहान, शशिकांत शर्मा, वीरपाल सिंह के अनुसार 23 प्रतिशत से अधिक परिषदीय स्कूलों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं। वहीं 648 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। सर्वाधिक टोटा अलीगंज ब्लाक में है। जिले में संचालित 1366 प्राथमिक व 561 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में एक लाख 60 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। शिक्षा के मुद्दे पर चर्चा करते हुए उमेश गुप्ता, हरिस्वरूप गुप्त, अरुणेश गुप्ता, राकेश गुप्ता ने सरकारों और जनप्रतिनिधियों को इस पर ध्यान देने को कहा है।
विज्ञापन

------------
स्थान - मंडी समिति
समय - 2 बजकर 10 मिनट
खेल प्रतिभाओं को मौका नहीं
पिछड़े जिले में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन उन्हें प्रशिक्षण एवं प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा। कोच सत्येंद्र सिंह यादव, फुटबाल संघ के जिला सचिव राजीव यादव बॉबी स्वीकारते हैं कि जिले में खेल प्रतिभाओं के लिए सुविधा तो दूर मार्गदर्शन तक नहीं है। इसके चलते निर्धन-ग्रामीण खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। बताते चलें कि फुटबाल, दौड़, ऊंचीकूद में जिले के बच्चे नेशनल तक पहुंचे हैं। खेल प्रतिभाओं को लेकर व्यापारी भी चिंतित है। व्यापारी बताते हैं उनके बच्चे भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन संसाधन न होने के चलते वह पीछे हट जाते हैं। मंडी समिति में चर्चा करते हुए प्रेम सिंह यादव, जालिम सिंह, श्याम सुंदर गुप्त, उमेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन

-----------
स्थान - क्रिश्चियन इंटर कालेज
समय - 2 बजकर 30 मिनट
विज्ञान, वाणिज्य व कृषि संकाय नहीं
बीस लाख की आबादी वाले जिले में उच्च शिक्षा के लिए राजकीय-एडिड कालेज का टोटा है। विज्ञान, वाणिज्य एवं कृषि संकाय के अभाव में निर्धन बच्चे शिक्षा नहीं ले पा रहे। इतना ही नहीं आश्वासनों के बाद भी जिले को बालिका महाविद्यालय नहीं मिल पा रहा। अभिभावक ओंकार सिंह यादव, स्नेह चौहान आदि का कहना है कि एडिड कालेज के अभाव में बच्चे बीएससी-बीकाम नहीं कर पा रहे। बताते चलें कि जिले में संचालित 135 से अधिक महाविद्यालयों में एक राजकीय, दो एडिड कालेज हैं। इनमें भी विज्ञान-वाणिज्य व कृषि संकाय नहीं है। इन मुद्दों पर क्रिश्चियन इंटर कालेज पर चर्चा हुई। यहां शिक्षक अशोक यादव, विश्वप्रताप सिंह, अरुण गुप्ता, रवि प्रताप, विनय कुमार ने जिले के जनप्रतिनिधियों से इन संकायों की स्थापना के लिए प्रयास करने की अपील की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें