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Etah News: 60 गायें, 60 एकड़ खेत... जिले से पंतनगर-करनाल तक बीजों का डंका

Sun, 06 Sep 2026 01:47 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
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अवागढ़ के गांव नगला लोधा की गोशाला में मौजूद वि​​भिन्न प्रजातियों के गोवंश। स्रोत स्वयं
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एटा। रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों के बीच अवागढ़ कस्बा स्थित गांव नगला लोधा के किसान हर्षवर्धन ने प्राकृतिक और वैज्ञानिक खेती की एक नजीर पेश की है। उनका यह प्रयोग केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि खेत, गोवंश और उन्नत बीजों का एक समग्र मॉडल है, जहां तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
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करीब 60 एकड़ में फैले इस फार्म पर गेहूं, धान, उड़द, मूंग समेत कई फसलें उगाई जा रही हैं। मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों की जगह जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य जैविक उत्पादों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव सक्रिय रहें।
इस फार्म की एक और खासियत है यहां की गोशाला जिसमें करीब 60 देशी गोवंश हैं। यहां साहिवाल, गिर और थारपारकर जैसी उन्नत देशी नस्लों का संरक्षण किया जा रहा है। नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए करनाल, हिसार और पंतनगर जैसे प्रतिष्ठित कृषि संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाला सीमन मंगाकर कृत्रिम गर्भाधान करवाया जाता है जिससे बेहतर और मजबूत नस्ल के गोवंश तैयार हो सकें।
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हर्षवर्धन ने बताया कि फार्म पर तैयार उन्नत नस्ल के गोवंश को नस्ल सुधार के उद्देश्य से अन्य क्षेत्रों और संस्थानों को भी भेजा गया है। मथुरा, नैनीताल, रामनगर के अलावा ऋषिकेश के काली कमली ट्रस्ट और मथुरा स्थित वेद मंदिर गुरुकुल जैसी संस्थाओं तक यह गोवंश पहुंचाए गए हैं। एनडीआरआई करनाल सहित विभिन्न केंद्रों से प्राप्त सीमन से भी नस्ल सुधार का काम लगातार जारी है।

उन्नत बीजों का उत्पादन : किसानों तक पहुंच का सेतु
हर्षवर्धन केवल फसल नहीं उगाते बल्कि उन्नत बीज तैयार करने का भी काम करते हैं। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालयों और संस्थानों से मूल बीज प्राप्त कर उनका फार्म पर गुणन किया जाता है। पर्याप्त मात्रा में बीज तैयार होने के बाद उसे कृषि अनुसंधान संस्थानों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है। वर्तमान में बासमती धान की 1509, 1692, 1718, 1121, 1637 और 1836 तथा गेहूं की पी-872, टीपीडब्ल्यू-836 और डब्ल्यू-327 जैसी उन्नत किस्मों के बीजों पर काम चल रहा है। करनाल, हिसार और पंतनगर से जुड़े किसान भी बीज लेने के लिए इस फार्म तक पहुंचते हैं। यह फार्म केवल फसलों तक सीमित नहीं है बल्कि यहां जैव विविधता को भी बढ़ावा दिया गया है। फार्म परिसर में आम, चीकू, पपीता, जामुन और अशोक सहित विभिन्न प्रजातियों के 200 से अधिक पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा गोशाला में तैयार देशी गाय का शुद्ध घी भी उपलब्ध कराया जाता है।

परिवार को मिल चुके हैं राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मान
हर्षवर्धन के अनुसार, उनके परिवार की प्राकृतिक खेती और गोवंश संवर्धन में पुरानी रुचि रही है। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके पिता को इस क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया था। वहीं, वर्ष 2021 में उन्हें स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोवंश संवर्धन और प्राकृतिक खेती के कार्यों के लिए सम्मानित किया।


किसान हर्षवर्धन लगातार गोसंवर्धन व उन्नतशील खेती व कार्य कर रहे हैं। गोवंशों की नस्लों के सुधार के क्षेत्र में उनका कार्य सराहनीय है। उन्हें कई स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। - आरपी शर्मा, जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एटा

अवागढ़ के गांव नगला लोधा की गोशाला में मौजूद विभिन्न प्रजातियों के गोवंश। स्रोत स्वयं

अवागढ़ के गांव नगला लोधा की गोशाला में मौजूद विभिन्न प्रजातियों के गोवंश। स्रोत स्वयं

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