एटा। कुष्ठ रोगियों को खोजने के लिए जनपद में अभियान चला। 15 दिन तक चले अभियान में विभाग के 4361700 रुपये खर्च कर दिए। अभियान पोलियो की तर्ज पर चलाया गया था। लेकिन टीमें जिले में 53 संभावित कुष्ठ रोगियाें को ही खोज पाईं। इनमें भी जांच के बाद मर्ज की पुष्टि होना बाकी है।
21 नवंबर से जिले में कुष्ठ रोगियों की खोज के लिए अभियान की शुरूआत हुई थी। इसमें रोगियों को खोजने के लिए 2077 टीमें लगाई गईं। टीमों को घर-घर जाकर पड़ताल करनी थी। अभियान 15 दिन यानी 4 जनवरी तक चला। इसमें टीमों द्वारा 2147473 व्यक्तियों की पड़ताल की गई। इस दौरान टीमों को कुष्ठ रोग के संभावित 53 मामले मिले। विभाग द्वारा एक टीम को 2100 रुपये के हिसाब से भुगतान किया गया। ऐसे में इस अभियान के दौरान कुष्ठ रोगियों को खोजने में 4361700 रुपये विभाग के खर्च हो गए। संवाद
टीमों में ये रहे शामिल
विभाग द्वारा अभियान के लिए 2077 टीमें बनाई गई थीं। प्रत्येक टीम में दो सदस्यों को रखा गया। इनमें एक आशा कार्यकर्ता और एक स्वयंसेवी व्यक्ति को लगाया गया।
जिले में हैं 32 कुष्ठ रोगी
जिले में कुष्ठ रोगियों की बात करें तो इनकी संख्या 32 है। इन सभी रोगियों का उपचार स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जा रहा है। कुष्ठ रोग दो प्रकार का होता है। पासी बैसिलरी व मल्टी बैसेलरी। पासी बैसिलरी के मरीज का छह माह तक उपचार चलता है। जबकि मल्टी बैसेलरी मरीज का एक वर्ष तक उपचार किया जाता है।
शासन से टीम के लिए रुपयों का निर्धारण किया गया था। उसी के अनुसार उनका भुगतान किया गया। टीमों को 53 संभावित रोगी मिले। उसकी जांच को सैंपल भेजे गए हैं। अभी पुष्टि नहीं हुई है। - डॉ. सतीश चंद्र नागर, नोडल अधिकारी कुष्ठ रोग