जलेसर। तहसील रोड पर नगर पालिका की भूमि पर अवैध रूप से बनाई गईं 28 दुकानों को सोमवार को बुलडोजर से ढहाकर कब्जेदारों को खदेड़ा गया। नोटिस दिए जाने के बाद भी दुकानदार दुकानें खाली करने के बजाय एक किसान संगठन के बैनर तले धरना प्रदर्शन कर रहे थे। कार्रवाई के दौरान एसडीएम-सीओ कई थानों के फोर्स के साथ मौजूद रहे।
तहसील रोड पर नगर पालिका की भूमि पर विभिन्न लोगों ने 41 साल पहले अवैध रूप से 28 दुकानों का निर्माण कर लिया था। पालिका ने कई बार दुकानों के अतिक्रमण हटाने को प्रयास किया, लेकिन दुकानदारों ने अतिक्रमण हटाने की बजाय कोर्ट में वाद दायर कर दिया था। न्यायिक एसडीएम कोर्ट ने पैरवी के अभाव में 4 नवंबर को एकपक्षीय सुनवाई करते हुए नगर पालिका के पक्ष में निर्णय कर दिया। इस निर्णय में दुकानें खाली करने और नहीं करने पर 1.64 करोड़ रुपये का जुर्माना तय किया था। इसके तहत पालिका ने दुकानदारों को नोटिस जारी किए थे। नोटिस मिलने पर हरकत में आए दुकानदारों ने एक किसान संगठन के साथ मिलकर नगर पालिका परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पांच थानों का फोर्स रहा तैनात
एसडीएम भावना विमल और सीओ ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की मौजूदगी में हुई 28 दुकानों को ढहाने की कार्रवाई के समय जलेसर, अवागढ़, सकरौली, निधाैलीकलां, पिलुआ थाने का फोर्स तैनात रहा। कार्रवाई के समय आसपास के क्षेत्र को सील कर छावनी बना दिया गया। दुकानों पर बुलडोजर चलने के समय 1984 से काबिज दुकानदार और उनके परिजन फड़फड़ाते रहे लेकिन किसी को कार्रवाई क्षेत्र में घुसने नहीं दिया गया।
दुकानदारों पर 1.64 करोड़ रुपये का जुर्माना
नगर पालिका के ईओ प्रद्युम्न सिंह ने बताया पालिका की भूमि पर अवैध रूप से बनी 28 दुकानों में काबिज दुकानदारों को पहले ही खाली करने का नोटिस दिया गया था। खाली न करने और प्रशासन के कार्रवाई करने पर 1.64 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने को नोटिस में कहा गया था जिसे दुकानदारों को भरना होगा।
एक दिन पहले दी गई थी दुकानदारों को हिदायत
एसडीएम भावना विमल ने रविवार को सभी 28 दुकानदारों को तहसील बुलाकर वार्ता की थी। वार्ता के समय सीओ ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। वार्ता के बाद दुकानदारों को इतनी जल्दी कार्रवाई होने का अनुमान नहीं था।
ध्वस्तीकरण कार्रवाई के दौरान दुकानों को खाली कर सामान ले जाते लोग। संवाद
ध्वस्तीकरण कार्रवाई के दौरान दुकानों को खाली कर सामान ले जाते लोग। संवाद