मोहम्मदपुर में उथला और गंदा पड़ा चिह्नित आदर्श तालाब। संवाद
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एटा। वर्षा जल संरक्षण के लिए सरकार की ओर से आदर्श तालाब योजना लागू की गई। जिले में इसके लिए 120 तालाब चिह्नित किए गए। सफाई-खोदाई कराने के अलावा इन्हें सुंदर रूप देने के लिए पौधरोपण और बैठने के लिए बैंच आदि की स्थापना भी करानी है, लेकिन इन तालाबों का काम अधर में लटका हुआ है। कहीं पर तो शुरू ही नहीं हो पाया। इस बीच अब अमृत सरोवर योजना का शोर शुरू हो गया है।
शासन की ओर से जिले में 120 तालाबों को आदर्श तालाब बनाया जाना था। एक तालाब के जीर्णोद्धार व सौंदरीयकरण पर करीब सात लाख रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। उसके बाद भी तालाबों के जीर्णोद्धार में लापरवाही और मनमानी बरती जा रही है। बरसात आने को है और तालाबों की खोदाई-सफाई नहीं हो सकी है। इस बीच अमृत सरोवर योजना का एलान कर 83 तालाबों का चिह्नांकन कर लिया गया है। इस पर काम करने के लिए जोर दिया जा रहा है।
मुहम्मदपुर के तालाब में बनाए जा रहे उपले
मनरेगा सेल की ओर से प्रत्येक विकासखंड में बने तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है, लेकिन मारहरा विकासखंड के मुहम्मदपुर में अभी तक आदर्श तालाब की खोदाई का काम ही शुरू नहीं कराया गया है। वर्तमान में यहां पर स्थानीय लोगों द्वारा गोबर के उपले बनाकर सुखाए जा रहे हैं। तालाब के नाम पर सिर्फ एक गड्ढा प्रतीत होता है।
मिसौली में पूरा नहीं हो पाया कार्य
ब्लॉक जलेसर के गांव मिसौली में बने आदर्श तालाब का अभी तक काम पूरा नहीं हो पाया है। आदर्श तालाब के रुप में अभी तक यहां पर पौधरोपण नहीं किया गया है। साथ ही पानी का इनलेट व आउटलेट तक नहीं बनाया गया है। जिसकी वजह से इसके गंदे पानी को भी बाहर नहीं निकाला जा सकता। जबकि बरसात का पानी पहुंचने का रास्ता नहीं है।