कई घाटों पर अभी चल रहा है निर्माण कार्य
स्थानीय लोगों ने अमर उजाला को बताया कि दशाश्वमेध घाट जैसे प्रमुख स्थल पर भी अब तक पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं थी। कुछ लाइटें प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम के दिन लगाई गईं, जबकि अन्य घाटों पर अभी भी पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। घाट के एक नाविक सुनील निषाद ने अमर उजाला को बताया कि दशाश्वमेध घाट पर अभी भी निर्माण कार्य जारी है, ललिता घाट पर भी अभी कार्य पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इसके बाद भी अभी ही लोकार्पण कार्यक्रम संपन्न करा दिया गया। यह सरकार की चुनावी मजबूरी को दिखाता है। यदि लोकार्पण करना था तो इसके पहले इस पूरे निर्माण कार्य को पूरा करा दिया जाना चाहिए था।
काशी घूमने आए औरंगाबाद के एक पर्यटक ने कहा कि इतने प्रमुख अवसर पर तुलसी घाट, हनुमान और दरभंगा घाट जैसे दर्जनों प्रमुख घाटों पर रंगाई-पुताई न करके भी प्रशासन ने केवल यही दिखाने की कोशिश की कि जहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजरें जाएं, वहां तक रंगाई-पुताई और रोशनी कर दी जाए, बाकी घाट किसी भी स्थिति में पड़े रहें। इनकी सुध नहीं ली गई।
पीएम की मौजूदगी में भी कटती रही लाइट
यूपी सरकार दावा करती है कि प्रदेश के प्रमुख क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन जिस समय प्रधानमंत्री वाराणसी नगरी में उपस्थित हैं, उस समय भी वाराणसी कैंट जैसे प्रमुख इलाके में बार-बार इलेक्ट्रिसिटी कट लगता रहा। इस पर एक स्थानीय दुकानदार सौरभ चौरसिया ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री के होने पर भी शहर की लाइट इतनी बार काटी जा रही है तो बाकी के दिनों में क्या स्थिति रहती होगी, इसकी कल्पना की जा सकती है। उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में बिना जनरेटर के एक भी दिन गुजारा करना संभव नहीं होता। सरकार को इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
हालांकि, काशी दर्शन के लिए आने वाले भक्त एक बात के लिए केंद्र सरकार को अवश्य श्रेय देते नजर आए कि बनारस में भी अब गंगा लगभग उतनी ही साफ और स्वच्छ दिखाई पड़ रही है जैसी कि वे ऋषिकेश या हरिद्वार में दिखाई पड़ती है। लोगों का कहना है कि सड़कों को चौड़ा करने, प्रमुख भवनों के विश्व स्तरीय निर्माण करने और गंगा की साफ-सफाई के कारण यहां आने वाले राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। इससे काशी और काशीवासियों का विकास होगा।