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दुर्गाशक्ति मामला: यूपी गलियारे से पहुंचा दिल्ली दरबार तक

Thu, 01 Aug 2013 12:17 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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निलंबित आईएएस अफसर दुर्गाशक्ति नागपाल का मामला लखनऊ के गलियारे से निकलकर अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गया है।
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यह प्रदेश का ऐसा पहला मामला है, जिसमें आईएएस अफसरों का केंद्रीय संगठन ऑल इंडिया आईएएस एसोसिएशन दखल दे रहा है। प्रदेश सरकार इस मामले में नागपाल को कोई रियायत देने के मूड में नहीं है।

बृहस्पतिवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित बोस की अगुआई में केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के राज्यमंत्री वी. नारायण सामी और कैबिनेट सेक्रेटरी अजित सेठ के सामने इस मामले को उठाते हुए इसमें दखल देने की मांग की जाएगी। उधर चर्चा है कि नागपाल ने भी नारायण सामी से समय मांगा है।
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दुर्गाशक्ति केनिलंबन केबारे में प्रदेश के कार्मिक विभाग ने मंत्रालय को कोई जानकारी नहीं दी है। भारतीय प्रशासनिक सेवा नियमावली के मुताबिक अफसर के निलंबन पर मंत्रालय को जानकारी देना जरूरी होता है। या फिर अफसर इस बारे में मंत्रालय को जानकारी दे सकता है।

तभी वह किसी तरह की कार्रवाई कर सकता है। हालांकि अभी तक दोनों ने इसकी जानकारी मंत्रालय को नहीं दी है। लिहाजा अब आईएएस अफसरों के केंद्रीय संगठन ने इसकी कमान संभाल ली है।

संगठन इस मामले को केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के सामने उठाकर इसमें दखल देने की मांग करेगा। कार्मिक मंत्रालय प्रधानमंत्री के पास है और नारायण सामी राज्यमंत्री हैं। इसके अलावा कैबिनेट सेक्रेटरी से भी मिलकर एसोसिएशन इस मामले को उनकेसामने रखेगा।

दिल्ली में इस मामले को वैसे तो एसोसिएशन उठा रहा है लेकिन असल में इसकी कमान दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति तैनात अफसर संभाले हुए हैं।

उत्तर प्रदेश आईएएस एसोसिएशन केअध्यक्ष आलोक रंजन ने कहा कि अभी तक नागपाल केमसले पर मुख्यमंत्री से मिलने का कोई कार्यक्रम नहीं है।

केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय कर सकता है हस्तक्षेप
2010 बैच की निलंबित आईएएस अफसर दुर्गाशक्ति नागपाल के मामले में केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय प्रदेश सरकार से जवाब तलब कर सकता है। मंत्रालय इस बारे में पूरी जानकारी देने को कह सकता है।

राज्य सरकार जवाब नहीं देती है तो मंत्रालय निलंबन को वापस लेने का आदेश दे सकता है। अगर ऐसा होता है तो राज्य सरकार की किरकिरी हो सकती है।

प्रोमिला शंकर के मामले में भी डीओपीटी ले चुका संज्ञान
दुर्गाशक्ति नागपाल का ये पहला मामला नहीं है, जिसमें केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय दखल कर सकता हो। इससे पहले 1976 बैच की आईएएस अफसर प्रोमिला शंकर मामले में मंत्रालय ने प्रदेश सरकार को जमकर लताड़ लगाई थी।
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हालांकि उस वक्त प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी। लेकिन मंत्रालय केहस्तक्षेप के बाद प्रदेश सरकार ने उनका निलंबन वापस ले लिया था। हालांकि सरकार ने निलंबन वापस लेने के बाद उन्हें किसी पद की जिम्मेदारी नहीं दी थी।

प्रोमिला शंकर ने इस मामले को खुद ही मंत्रालय केसामने उठाया था। उस वक्त यूपी आईएएस एसोसिएशन ने इस मामले में चुप्पी साध ली थी।
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