सीबीआई कुंडा में डीएसपी जिया उल हक और प्रधान नन्हें यादव के भाई सुरेश यादव के कत्ल की गुत्थी अब तक सुलझा नहीं पाई है।
जांच एजेंसी ने अब नन्हें यादव की हत्या के खुलासे पर ध्यान केंद्रित किया है। जांच एजेंसी का मानना है कि नन्हें की हत्या सुनियोजित थी।
इस मामले में पिछले कुछ दिनों से सीबीआई ने पूर्व मंत्री राजा भैया के करीबियों से पूछताछ की है। सीबीआई की पूछताछ के बाद राजा भैया की मुश्किलें बढ़ने के आसार बन गए हैं।
नहीं मिल सकी बैलेस्टिक रिपोर्ट
नन्हें के भाई पवन की लाइसेंसी पिस्टल की बैलेस्टिक रिपोर्ट भी अब तक मिल सकी है। रिपोर्ट की अनुपलब्धता से सीबीआई यह तय नहीं कर सकी नन्हें के भाई पवन की पिस्टल से गोली चलाई गई अथवा नहीं।
जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अभी तक की पड़ताल में हासिल बयानों से इस बात की संभावना बनी हुई है कि सीओ जियाउल हक पर गोली चलाने वालों में पवन भी शामिल था।
अगर उसकी पिस्टल से गोली चलने की बात साबित होती है तो उससे नए सिरे से पूछताछ की जाएगी।
दूसरी तरफ सीबीआई की टीम को सोमवार को भी नन्हें के गांव के सभी लाइसेंसी शस्त्र हासिल नहीं हो सके। सीबीआई की टीम ने गांव में लोगों से इसे जल्दी ही उपलब्ध कराने को कहा है।
सूत्र बताते हैं कि सीबीआई इन सभी शस्त्रों की फोरेंसिक जांच करा कर यह जानने की कोशिश कर रही है कि दो मार्च की रात को इनमें से कितने शस्त्रों से फायरिंग की गई।
इस बीच रिमांड पर लाए गए राजा भैया के करीबी गुड्डू सिंह और उसके भाई राजीव की रिमांड अवधि समाप्त होने की वजह से निर्धारित समय पर जेल में वापस निरुद्ध करा दिया।
सीबीआई की पूछताछ का सिलसिला फिलहाल राजा भैया के करीबियों पर केंद्रित है।
इसकी वजह यह है कि सीबीआई नन्हें यादव की हत्या की सुनियोजित साजिश के बारे में जानकारी चाहती है और यह भी पता करने की कोशिश है कि पूर्व मंत्री राजा भैया इस साजिश से किस हद तक जुड़े हैं।
गौरतलब है कि गत 2 मार्च को बलीपुर के ग्राम प्रधान नन्हें यादव की हत्या के बाद वारदात की जगह पर गए कुंडा में डीएसपी जिया उल हक की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है।