सीओ जियाउल हक की माता हाजरा खातून और पिता शमशुल हक।
खुखुंदू। सीओ जियाउल हक हत्याकांड में 13 साल बाद लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत से एक बार फिर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया समेत पांच आरोपियों को क्लीनचिट देने पर उनकी माता हाजरा खातून और पिता शमशुल हक के आंसू छलक आए। उनका कहना है कि चक्रव्यूह तो वही रचे थे। जियाउल के माता-पिता ने कहा कि जब अदालत का फैसला है तो हम क्या कर सकते हैं। हमे भी स्वीकार करना पड़ेगा। 2024 में सीबीआई की विशेष अदालत ने सीओ जियाउल हक हत्याकांड में शामिल 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, उस समय भी जियाउल के माता-पिता ने राजा भैया को सजा नहीं बनाने पर दुख व्यक्त किया था। खुखुंदू थाना क्षेत्र के जुआफर गांव निवासी सीओ जियाउल हक की प्रतापगढ़ के कुंडा में तैनाती के दौरान दो मार्च 2013 में हथिगवां में भीड़ ने पहले उन्हें लाठी-डंडे से पीटा और फिर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, उनके नजदीकी गुलशन यादव समेत पांच और अन्य अज्ञात पर हत्या के आरोप में की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने पांच अक्तूबर 2024 को राजा भैया और गुलशन यादव समेत पांच को क्लीनचिट देते हुए 10 दोषियों को सजा सुनाई थी।
उसके चार दिन बाद फिर कोर्ट ने 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा और 15-15 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने सीबीआई अदालत के क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करते हुए बरी किए गए आरोपियों की भूमिका की दोबारा जांच की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने फिर से जांच की और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी।
हालांकि, इस बार भी विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह की अदालत ने पर्याप्त कारण न मिलने का हवाला देते हुए राजा भैया, उनके मीडिया प्रभारी हरिओम श्रीवास्तव, सपा नेता गुलशन यादव, गुड्डू सिंह और रोहित सिंह को क्लीनचिट दे दी है।
कोर्ट के फैसले के बाद रविवार को जियाउल हक के माता हाजरा खातून और पिता शमशुल हक का कहना है कि बेटे की हत्याकांड का चक्रव्यूह रचने वाला ही बरी हो गया। इससे बड़े दुख की बात क्या हो सकती है। जब इनसे पूछा गया कि बाकी दोषियों को तो उम्रकैद की सजा हुई तो बोले ठीक है मगर जो बरी हुए है, वे भी उनसे अधिक दोषी है। खैर अदालत के फैसला मंजूर है। यह कहते हुए माता-पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े। संवाद