भटनी के केवड़ा चौराहे पर बर्फी की दुकान लगाता दुकानदार। संवाद
भटनी। कस्बे की केवड़ा चौराहे की बर्फी अपनी शुद्धता और स्वाद के कारण दूर-दूर तक पहचान बना रही है। रोज करीब 500 लीटर दूध से बनी बर्फी शाम तक बिक जाती है। इस खास मिठाई की मांग त्योहारों में बढ़ जाती है। दिल्ली, मुंबई समेत अन्य महानगरों में रहने वाले लोग भी घर आते और जाते समय इसे जरूर ले जाते हैं। आलम है कि कड़ाही से उतरते ही ग्राहकों का जमावड़ा लग जाता है और बर्फी चंद घंटे में ही खत्म हो जाती है, लेकिन इसे शुद्ध बनाने के लिए कारीगरों को भी घंटों कड़ाही के सामने तपना पड़ता है।
भटनी रेलवे स्टेशन से सटे उत्तर दिशा में केवड़ा वार्ड स्थित है। वार्ड के रहने वाले दुकानदार केवड़ा वार्ड के चौराहे पर बर्फी और चाय की दुकान चलाते हैं। दुकानदार सुबह गांवों से आने वाले दुधियों से दूध खरीदते हैं और फिर उसे कोयले वाले चूल्हे पर जलाते हैं। पारंपरिक विधि से तैयार खोवा से पेड़ा बनता है, जिसकी शुद्धता ही बिक्री का आधार है।
दूध के साथ खुद भी तपना पड़ता है
शुद्ध बर्फी बनाने के लिए पहले शुद्ध दूध की व्यवस्था करनी होती है। फिर इसे कोयले की तेज आंच पर दो से तीन घंटे गर्म करना पड़ता है। तपती आग पर चढ़ी कड़ाही में उबल रहे दूध को लगातार चलाना पड़ता है, जिससे कि वह जले नहीं। बर्फी की शुद्धता के साथ कोई समझौता नही किया जाता है।
ओमप्रकाश, दुकानदार
भोर से ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती। त्योहार और लगन के समय में दूध की कमी के चलते कई बार दुकान बंद हो जाती है। अगर शुद्धता से समझौता किया तो हमारा कारोबार चौपट हो जाएगा।
लक्ष्मी, दुकानदार