पानी चला पाताल की ओर, लोग मुश्किल में
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बाढ़ और आग की त्रासदी झेलने को मजबूर रुद्रपुर क्षेत्र में जल का संकट भी गहराता जा रहा है। भूगर्भीय जल स्तर के तेजी से नीचे जाने से पानी की किल्लत बढ़ती जा रही हैं। पिछले तीन वर्षों से दोआबा क्षेत्र में भू जल स्तर काफी नीचे चला गया है। इस कारण भीषण गर्मी में 75 प्रतिशत हैंड पाइप पानी नहीं दे रहे हैं।
तीन साल से सूखे के चपेट में रहे दोआबा और कछार के इलाके में इस वर्ष भू जल के स्तर में 15 फीट की गिरावट आई हैं। लघु सिंचाई विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष भूजल स्तर क्रमश: तीन से पांच फीट गिर रहा हैं। विभाग ने इस वर्ष भू जल स्तर में रिकार्ड गिरावट दर्ज की है। भूजल स्तर में गिरावच के कारण दोआबा और कछार क्षेत्र की दो लाख की आबादी को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। जल स्तर के तेजी से नीचे जाने के कारण खेतों की सिंचाई भी प्रभावित हुई है। लघु सिंचाई विभाग की ओर किसानों के खेत में कराई गई बोरिंग फेल होती जा रही है।
रुद्रपुर नगर में लगे निजी और सरकारी हैंडपंपों से पानी नहीं निकल रहा है। तीस हजार की आबादी वाले नगर में जल संकट गहराने से चौराहों पर लगे सरकारी वाटर कूलर बंद पड़े हैं। इन वाटर कूलर को इंडिया मार्का हैंड पंप से जोड़ा गया है। लघु सिंचाई विभाग के तकनीकी सहायक वसीर अहमद ने बताया कि दोआबा और कछार क्षेत्र में भू जल स्तर तीन साल में 25 फीट नीचे गया है। इस कारण 100 फीट तक कराई गई बोरिंग भी बहुत कम पानी दे रही है। इस वर्ष जल स्तर में 15 फीट की गिरावट आई हैं।