पंचायत चुनाव में प्रधान पद के प्रत्याशी आचार संहिता की जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं। उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रत्याशी कोई कसर नहीं छोड़ रहे। मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के कई माह से शराब, रुपये और मीट दिया जा रहा है।
सुबह से लेकर शाम तक गोल बनाकर प्रत्याशी प्रचार करते मिल रहे हैं। जनसंपर्क में गोलबंदी खूनखराबे का रूप ले रही है। चुनाव में प्रधान प्रत्याशियों को खर्च निर्धारित नहीं होने के कारण निष्पक्ष चुनाव की कल्पना करना बेइमानी साबित हो रही है।
पंचायत चुनाव का बिगुल बजते ही गांव अखाड़े के रूप में आने लगे। चुनाव को लेकर गांव में गोलबंदी ने स्थिति को और खराब कर दिया। शाम होते ही अधिकांश गांव की हालत मयखाने की तरफ नजर आने लगी है। गलियों और सड़कों पर लोग शराब के नशे में झूमते मिल जाएंगे। हैसियत के हिसाब से प्रधान पद के प्रत्याशी लोगों को कच्ची, देसी और अंग्रेजी शराब उपलब्ध करा रहे हैं। यह दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। यह सब प्रशासनिक अधिकारियों के नाक तले हो रहा है। इसके बाबजूद पुलिस चुनाव अचार संहिता का कड़ाई से पालन कराने में असफल साबित हो रही है।