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Deoria News: विधानसभा से सांसद तक बुलंद हुई आवाज, फिर भी कुशीनगर से नहीं उड़ी जहाज

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कुशीनगर एयरपोर्ट।
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कुशीनगर। कुशीनगर एयरपोर्ट को प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत पूरे देश में सबसे अधिक छूट देना, रात में उड़ान के लिए लाइसेंस में अपग्रेड होना, जिला प्रशासन और अथॉरिटी की ओर से लगातार प्रयास के बाद बाद भी जो संभावनाएं उत्पन्न हुई उसके बाद पूरी तरह से एयरलाइंस कंपनियों की रुचि पर मामला टिका रहा। संभावनाएं उड़ान को लेकर इंगित कर रही हैं, लेकिन कुशीनगर से बड़े महानगरों के रूट पर उड़ान के लिए कोई विमानन कपानियां तैयार नहीं है। इससे तकनीकी मजबूती मिलने और रात में उड़ान की क्लियरेंस मिलने के बाद भी आकाश खाली पड़ा है। विधानसभा से सांसद तक जनप्रतिनिधियों के आवाज बुलंद होने के बाद भी बुद्ध की धरती से जहाज नहीं उड़ सके।
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कुशीनगर एयरपोर्ट से 2022 में 75 यात्रियों के साथ शुरू हुआ संचालन अक्तूबर 2023 से बंद हो गया। तकनीकी समस्या, यात्रियों की अनुपलब्धता और लाइसेंस अपग्रेड न होने जैसी तरह-तरह की बातों का हवाला देते हुए हवाई सेवाओं का संचालन बंद कर दिया गया लेकिन इन सारी समस्याओं को दूर करने के लिए जिला प्रशासन और एयरपोर्ट ऑथारिटी ने विमानन मंत्रालय से सामंजस्य बनाकर काम करना शुरू किया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कुशीनगर का लाइसेंस विजिविलिटी फ्लाइंग रेगुलेशन (वीएफआर) श्रेणी से इंस्ट्रूमेंट फ्लाइंग रेगुलेशन (आईएफआर) श्रेणी में अपग्रेड हो गया। इसके अतिरिक्त प्रोत्साहन योजना के तहत पूरे देश में सबसे अधिक छूट भी कुशीनगर एयरपोर्ट को मिली थी। कुछ माह पूर्व रोड़ा बन रहे मकानों और एक दर्जन से अधिक परिवारों को हटाने का आदेश भी हाईकोर्ट ने दिया और उन्हें हटा दिया गया लेकिन अब एयरलाइंस कंपनियों की रुचि एक बार फिर उड़ान में बाधक है। राज्यसभा सदन में कुंवर आरपीएन सिंह ने एयरपोर्ट के वर्तमान कार्यवाही पर विमानन मंत्रालय से सवाल किया तो जवाब जो था वह हैरान करने वाला था। विमानन मंत्री ने जो जवाब दिया उसी में कुशीनगर एयरपोर्ट की ऐतिहासिकता के साथ इसके विशेष होने की बात छिपी थी, लेकिन उन्होंने भी एयरलाइंस कंपनियों के रुचि न लेने की बात कह पल्ला झाड़ लिया। कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का लाइसेंस कुछ माह पूर्व वीएफआर से आईएफआर में अपग्रेड हो गया, इससे रात और खराब मौसम में भी उड़ान का रास्ता साफ हो गया।उम्मीद थी कि एयरलाइंस कंपनियां नए सिरे से रुचि दिखाएंगी, लेकिन हालात उलटे हैं। अभी तक किसी भी कंपनी ने नियमित उड़ान शुरू करने के संकेत नहीं दिए हैं। एयरपोर्ट से जुड़े अधिकारी और स्थानीय लोग अलग-अलग कारण बता रहे हैं, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि एयरलाइंस के लिए फिलहाल यह रूट व्यावसायिक रूप से आकर्षक नहीं दिख रहा।एयरलाइन कंपनियों के सूत्रों के अनुसार इस क्षेत्र में पैसेंजर लोड कम दिख रहा है। वहीं, स्थानीय प्रशासन इसे मार्केटिंग और कनेक्टिविटी की कमी से जोड़ रहा है। बिहार और नेपाल के यात्रियों की संभावनाएं होने के बावजूद एयरलाइन कंपनियां रिस्क लेने को तैयार नहीं हैं।



तकनीकी योग्यता के साथ स्थिर यात्रियों के डाटा को लेकर असमंजस में एयरलाइंस कंपनियां

- एयरपोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि आईएफआर लाइसेंस मिलने से ऑपरेशनल क्षमता काफी बढ़ी है, लेकिन किसी भी एयरलाइन के लिए सिर्फ तकनीकी योग्यता काफी नहीं होती। उन्हें स्थिर यात्रियों का डेटा चाहिए। फिलहाल कंपनियां इसी डेटा को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। एक निजी एयरलाइन के वरिष्ठ कर्मी ने बताया कि अभी हमारी कंपनी की प्राथमिकता उन रूट्स पर हैं जहां पहले से बड़ी यात्री संख्या मौजूद है। नए एयरपोर्ट पर उड़ान शुरू करना काफी खर्चिला होता है। कुशीनगर में संभावनाएं तो हैं, लेकिन तत्काल व्यावसायिक लाभ स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहा।
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उड़ान के लिए कई अन्य आधारभूत जरूरतों की भी दरकार
-जानकारों के अनुसार, एयरलाइन कंपनियां किसी भी नए रूट पर तभी उड़ान शुरू करती हैं जब उन्हें स्थिर पैसेंजर लोड मिले। कम से कम 70–80 फीसदी और लंबी अवधि में लाभ दिखे। पूर्वांचल और बिहार की संभावनाओं के बावजूद एयरलाइन कंपनियों के पास फिक्स डेटा नहीं है कि रोज कितने यात्री कुशीनगर से यात्रा करेंगे। इससे पहले भी जब स्पाइसजेट ने अपनी हवाई सेवा बंद की थी तो यात्रियों की अनुपलब्धता की चर्चा थी। इसके अलावा कई संभावित यात्रियों के लिए गोरखपुर और पटना पहले से विकल्प है। इसके अलावा एयरलाइंस के लिए ऑपरेशनल लागत बहुत अधिक है जैसे कि एयरक्राफ्ट अलॉट करना, क्रू रखना, ग्राउंड स्टाफ, स्लॉट्स और पार्किंग, फ्यूल, मेंटेनेंस रखना पड़ेगा। वहीं, इंडिगो, स्पाइसजेट, एयर इंडिया एक्सप्रेस आदि की कई एयरलाइंस पहले से चल रहे लाभ वाले रूट्स को ही प्राथमिकता दे रही हैं। इसके अलावा यदि किसी एयरपोर्ट से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या विदेश तक टैग की गई उड़ाने जुड़ती हैं, तभी रूट सफल होता है। कुशीनगर तीर्थस्थल है, लेकिन बिजनेस या ट्रांजिट ट्रैफिक का बड़ा बेस नहीं है। सिर्फ तीर्थ पर्यटन से रूट लंबे समय तक नहीं चलता जब तक मजबूत कनेक्टिविटी न हो, क्योंकि पर्यटन सीजन में ही यहां अधिक यात्री आते हैं बाकी के समय में आसपास के यात्रियों को इकट्ठा कर ही एयरपोर्ट को संचालित किया जा सकता है हालांकि एयरलाइंस को सालभर स्थिर ट्रैफिक चाहिए, सिर्फ दो से तीन महीनों का नहीं।

- एयरपोर्ट उड़ान में जोर भी बाधाएं थी, उसे दूर कर लिया गया है। कोर्ट में जो मामला था, स्थानीय लोगों से बात कर उसका भी निस्तारण कर दिया गया। अब विमानन कंपनियों के ऊपर उड़ान शुरू करना निर्भर करता है। एयरपोर्ट अथॉरिटी विमानन कंपनियों में लगातार संपर्क में है।
महेंद्र सिंह तवंर, डीएम कुशीनगर

- आईएलएस का काम अंतिम चरण में चल रहा है, इससे उड़ान होने में कोई दिक्कत नहीं है। मुख्य पेंच आईएफआईआर का लाइसेंस नहीं मिलना था। 22 जुलाई को वह भी मिल गया। पांच महीने में 20 बार से अधिक विमानन कंपनियों को मेल फार्वड किया जा चुका है। कोई जवाब नहीं मिल रहा है।
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प्राणेश कुमार राय,इंटरनेशल एयरपोर्ट अथार्रिटी कुशीनगर
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