राजकीय इंटर कॉलेज से बाहर निकलतीं छात्राएं। संवाद
देवरिया। जिले के 179 परीक्षा केंद्रों पर सोमवार से अव्यवस्था के बीच यूपी बोर्ड की परीक्षा शुरू हुई। पहले ही दिन कई केंद्रों पर कई कक्ष निरीक्षक नहीं पहुंचे। कुछ जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं रही। पूरे दिन जिला स्तरीय कंट्रोल रूम से परीक्षा की निगरानी की जाती रही। परसौना स्थित बालजीत अशर्फी इंटर कॉलेज में प्रथम पाली की परीक्षा के दौरान ही एक छात्रा बेहोश हो गई। उसकी प्राथमिक चिकित्सा के बाद उसे परीक्षा में बैठाया गया। जिले के पर्यवेक्षक बनाए गए डायट महराजगंज के उपप्राचार्य सत्येंद्र कुमार ने कई केंद्रों का निरीक्षक किया, वहीं छह सचल भी सक्रिय रहे। पहले दिन किसी केंद्र से नकलची पकड़े जाने की सूचना नहीं रही।
माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश की देखरेख में सोमवार से हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा शुरू हुई। पहले दिन प्रथम पाली में हाईस्कूल की हिंदी, प्रारंभिक हिंदी व इंटर में सैन्य विज्ञान तथा दूसरी पाली में इंटर में हिंदी व सामान्य हिंदी के प्रश्न पत्रों की परीक्षा हुई। इसमें हाईस्कूल के 59,176 और इंटरमीडिएट के 66,983 परीक्षार्थी पंजीकृत रहे। केंद्रों पर माध्यमिक के कुल 2385 एवं बेसिक के 1445 शिक्षकों की तैनाती कक्ष निरीक्षक के रुप में की गई थी। हालांकि पहले ही दिन कई केंद्रों पर जिन कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी निर्धारित की गई थी, उसमें से अधिकांश नहीं पहुंचे। इसमें डीएन इंटर कॉलेज रुद्रपुर, श्री हनुमान विद्या मंदिर इंटर कॉलेज बरांव, सर्वेादय उमावि.विद्यालय मुसैला, श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज बरहज सहित अन्य केंद्र शामिल रहे। नकल रोकने के लिए प्रशासन की ओर से सख्त निगरानी व्यवस्था की गई थी।
कंट्रोल रुम से केंद्रों की पल-पल की निगरानी यहां तैनात कर्मचारी सोमवार की सुबह 11 बजे करते मिले। कुछ कर्मचारी परीक्षा के दौरान ही मोबाइल में व्यस्त भी दिखे। कंट्रोल रूम के प्रभारी महेंद्र प्रसाद ने बताया कि कुछ केंद्रों पर परीक्षार्थी लेट से पहुंचे थे, उन्हें जांच के बाद प्रवेश दे दिया गया। हर केंद्र पर दो सुरक्षा गार्ड स्ट्रांग रुम में, दो बाहर तैनात किए गए हैं। कुछ केंद्रों ने कक्ष निरीक्षकों के नहीं पहुंचने की शिकायत दर्ज कराई है। एक केंद्र पर छात्रा के बीमार होने पर उसकी प्राथमिक चिकित्सा कराने के बाद उसे पुन:परीक्षा में बैठने का अवसर दिया गया।
जीआईसी के प्रधानाचार्य को सचल दल में नहीं शामिल किया गया : पूर्व के वर्षों में शहर स्थित जीआईसी के प्रधानाचार्य को हर वर्ष बोर्ड परीक्षा के दौरान सचल दल में शामिल किया जाता रहा है। इस बार इन्हें शामिल नहीं किया गया है। यह बात माध्यमिक शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे लेकर सबके अपने-अपने तर्क है। वहीं जीआईसी के एक उपप्रधानाचार्य को वहां का केंद्र व्यवस्थापक तथा दूसरे को जिला स्तरीय कंट्रोल रुम का प्रभारी बनाया गया है।