अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। शहर के कसया ढाले पर जाम से निजात दिलाने की बहुप्रतीक्षित अंडरपास और ओवरब्रिज का मामला पेचीदगियों में उलझकर रह गया है।यहां प्रस्तावित अंडरपास जहां मुकदमेबाजी में फंस गया है, वहीं ओवरब्रिज (आरओबी) के डिजाइन पर रेलवे ने आपत्ति जता दी है। ऐसे में लोगों को राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल अधर में लटक गई है। कसया ढाला शहर के सबसे व्यस्त रेलवे क्रॉसिंग में शुमार है। यहां से होकर हर दिन वैशाली सुपर फास्ट और बिहार संपर्क क्रांति समेत 40 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। इसके चलते सुबह छह बजे से लेकर रात में 11 बजे तक फाटक बंद होता और खुलता रहता है।
सबसे अधिक समस्या सुबह 09 बजे से लेकर शाम पांच बजे के बीच होती है। क्योंकि इस वक्त दोनों तरफ से ट्रेन के अलावा मालगाड़ियों का भी आवागमन रहता है। ऐसे में ढाला बंद होते ही दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है, जिससे शहर दो हिस्सों में बंट जाता है।
स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, मरीजों को लेकर जा रहे परिजन और रोजमर्रा के कामकाज में लगे लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। करीब एक साल पहले पूर्वोत्तर रेलवे ने यहां अंडरपास निर्माण की प्रक्रिया शुरू की थी। शुरुआती सर्वे और प्रस्ताव तैयार होने के बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकल जाएगा।
लेकिन इसी बीच जमीन और तकनीकी पहलुओं को लेकर मामला अदालत पहुंच गया, जिससे अंडरपास का काम शुरू ही नहीं हो पाया। बीते साल दिसंबर में इसके लिए बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी, तब तक ओवरब्रिज का प्रस्ताव आ गया। इसके बाद अंडरपास का मामला शांत पड़ गया है। सदर विधायक की पहल पर प्रदेश सरकार ने जाम से निजात के लिए यहां ओवरब्रिज निर्माण को मंजूरी दे दी।
सेतु निगम की तरफ से 664 मीटर लंबे पुल के लिए डीपीआर शासन को भेजा, जिसे मंजूर कर लिया गया। इसमें रेलवे लाइन के ऊपर रेलवे को और शेष दोनों तरफ सेतु निगम को निर्माण कराना है।