जिले में स्वच्छ भारत अभियान को धक्का लग रहा है। गांवों में शौचालयों के निर्माण में लापरवाही बरती जा रही है। जिम्मेदार शौचालयों के सरकारी धन का बंदरबांट कर रहे हैं।
बैतालपुर ब्लॉक के कोइलगढ़हा गांव में इसी तरह का एक मामला सामने आया है। डीपीआरओ ने तत्कालीन प्रधान और सेक्रेटरी के खिलाफ गबन और सरकारी कार्य में बाधा का केस दर्ज करने के लिए रुद्रपुर कोतवाली में तहरीर दी है।
इसके पहले भलुअनी के फतेहपुर गांव में शौचालय निर्माण में धांधली उजागर हुई थी। जिस पर सीडीओ ने केस दर्ज करने का आदेश दिया था।
जिला पंचायत राज अधिकारी बीबी सिंह ने बताया कि बैतालपुर के कोइलगढ़वा गांव में वित्तीय वर्ष 2014-15 में विश्व बैंक से सहायता प्राप्त नीर निर्मल परियोजना के अंतर्गत शौचालय बनाए गए हैं।
जिला कन्सलटेंट राजेश यादव ने मंगलवार को शौचालयों का निरीक्षण किया।
जिसमें वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद भी गनेश, तारकेश्वर, जयराम, गोरखनाथ, प्रेम और खपहड़वा टोला के श्रीकिशुन, मंजू, रामसनेही, नोनिया टोला के मिटठू, छविलाल, राजधानी, छोटेलाल, विंदगढ़वा टोला के राम बेलास, मुन्ना तिवारी, रघुवीर, भीम आदि के शौचालय अधूरे पाए गए।
जबकि निर्माण के लिए जिला पंचायत राज कार्यालय ने पूरी धनराशि ग्राम पंचायत के बैंक खाते में भेज दी गई थी। खाते का संचालन प्रधान और सेक्रेटरी संयुक्त रूप से करते हैं।
यही दोनों लोग व्यक्ति इस खाते से धन निकालकर लाभार्थी को उपलब्ध कराते हैं।
लाभार्थी को पूरी धनराशि समय से उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी होते हैं। जांच से स्पष्ट है कि तत्कालीन ग्राम प्रधान कमल और सेक्रेटरी धर्मेंद्र कुमार सरकारी धन के गबन के संयुक्त रूप से दोषी हैं।