देवरिया में सबसे गंदे गांव के तौर पर ब्लॉक में बदनाम हुए सकतुआ बुजुर्ग को बदलने की सौगंध ग्रामीणों ने खाई है। गांववालों ने शपथ ली है कि अब वह खुले में शौच नहीं जाएंगे। संपूर्ण स्वच्छता अभियान से जुड़कर यहां के ग्रामीणों ने गंदगी से भरी गलियों की बदरंग छवि बदलकर गांव में नवरंग से चमकती नई सुबह लाने की ठानी है। मंगलवार को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के संपूर्ण स्वच्छता अभियान (सीएलटीएस एप्रोच) के जिला परियोजना समन्वयक बृजेश कुमार पाण्डेय ने गांववालों को खुले में शौच मुक्ति की शपथ दिलाई।
बृजेश कुमार पाण्डेय ने प्रेरकों के सहयोग से गांव का पूरा नक्शा जमीन पर तैयार कराया। इसके बाद विविध रंगों से गांव की गलियों और सुविधाओं को रेखांकित किया गया। जिला समन्वयक ने कहा कि जहां-जहां लोग शौच के लिए जाते हैं। उसे पीले रंग से इंगित करें। देखते ही देखते पूरा गांव पीले रंग से रंग गया। नक्शे में बंजरिया-तरकुलवा मार्ग से सकतुआ मोड़ तक सबसे ज्यादा पीला रंग देखने को मिला।
सबकी सहमति से प्रधान कौशल किशोर तिवारी ने कहा कि इस गांव को आप सबके सहयोग से खुले में शौच मुक्त स्वच्छ गांव बनाएंगे। खुले में शौच जाने वाले परिवार को सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए ग्राम पंचायत प्रस्ताव नहीं करेगी। गांववालों ने खुले में शौच न जाने का संकल्प लिया। कहा कि जब तक शौचालय निर्माण नहीं करा लेंगे, तबतक खुर्पी या कुदाल लेकर जाएंगे और शौच को ढकेंगे । सुबह-शाम निगरानी हेतु टीम का गठन किया गया।