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छह सौ घरों में हुआ छिड़काव

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छह सौ घरों में हुआ छिड़काव
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कालाजार से बचाव के लिए तीन ब्लॉकों से शुरू हुआ अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। कालाजार प्रभावित गांवों में कालाजार की वाहक बालू मक्खी से बचाव के लिए दवा के छिड़काव का कार्य शुरू कर दिया गया है। जिले के तीन ब्लॉकों के प्रभावित करीब छह सौ घरों में अल्फा साईपर मेथरीन का छिड़काव किया गया। इस कार्य में दस टीमें लगाई गई हैं, जिसमें 60 कर्मी लगाए गए हैं।
जिले के आठ ब्लॉकों बनकटा, पथरदेवा, भटनी, भाटपाररानी, बैतालपुर, देसही देवरिया, भलुअनी, लार के 48 कालाजार प्रभावित गांवों में सोमवार से कालाजार की वाहक बालू मक्खी से बचाव के लिए छिड़काव अभियान का शुभारंभ हुआ, जो 14 अप्रैल तक चलेगा। दो दिन में जिले के पथरदेवा, बनकटा, भाटपाररानी ब्लॉक के कालाजार प्रभावित करीब छह सौ घरों में अल्फा साईपर मेथरीन की पांच फीसदी दवा का छिड़काव किया गया। मंगलवार को पथरदेवा के धुसवा गांव, बनकटा के जानकी कुटिया और भाटपाररानी के धरमखोर गांव में छिड़काव कार्य हुआ। बनकटा ब्लॉक में तीन टीम, पथरदेवा और भाटपाररानी ब्लॉक में एक-एक टीम छिड़काव कार्य में लगी है। प्रत्येक टीम को प्रतिदिन 60 घरों में छिड़काव करना है।
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छिड़काव अभियान में लगे वेक्टर बार्न डिजीज (वीबीडी) प्रोग्राम परामर्शदाता डॉ. एसके पांडेय ने बताया कि चिह्नित गांवों में छिड़काव व निरोधात्मक कार्य जारी है। वेक्टर जनित रोग नियंत्रण के लिए अल्फा साईपर मेथरीन पांच फीसदी दवा का छिड़काव कराया जा रहा। अभियान में संबंधित क्षेत्र की आशा एवं एएनएम सहयोग करेंगी। इस संबंध में सभी को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि कालाजार रोग बालू मक्खी के काटने से होता है। बालू मक्खी को जड़ से समाप्त करने के लिए ही दवा का छिड़काव किया जा रहा है। बालू मक्खी जमीन से छह फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती है। इसलिए छिड़काव घर के अंदर छह फीट तक कराना है। छिड़काव के बाद तीन माह तक घर में पुताई नहीं करनी चाहिए। इस दौरान डब्लूएचओ के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. सागर घोडेकर, वरिष्ठ मलेरिया अधिकारी ताज मुहम्मद, हेल्थ इंस्पेक्टर रवि प्रकाश आदि मौजूद रहे।
नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है बालू मक्खी
कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। इसके काटने के बाद लोग बीमार हो जाते हैं। उन्हें बुखार होता है और रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है। लक्षण दिखने पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है। भूख कम लगती है। शरीर काला पड़ जाता है।
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घर में करें छिड़काव
जिले के आठ ब्लॉकों में करीब 24,224 घरों में आईआरएस (अंदरूनी अवशिष्ट छिड़काव) छिड़काव कराया जा रहा है। इससे करीब एक लाख 33 हजार से अधिक की आबादी को सुरक्षित किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बालू मक्खी से बचाव के लिए घरों में दवा छिड़काव अवश्य करवाना चाहिए, जिससे मक्खियां मर जाएं।
-डॉ. आलोक कुमार पांडेय, सीएमओ
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