देवरिया। एएसडीएम कोर्ट द्वारा मजार की जमीन को बंजर घोषित किए जाने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच मामला सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा कार्रवाई रोकने की सिफारिश ने मजार कमेटी की उम्मीदें बढ़ा दीं हैं।
बोर्ड ने डीएम को भेजे पत्र में वक्फ के कागजात में मजार के नाम जमीन दर्ज होने का हवाला दिया है। हालांकि, डीएम दिव्या मित्तल ने इस मामले में कुछ भी बोलने से इन्कार किया। वहीं, एसडीएम का कहना है कि वक्फ की संपत्ति का हक बदलने के लिए शासन को पहले ही पत्र लिखा जा चुका है।
शहर के गोरखपुर रोड ओवरब्रिज के बगल में स्थित हजरत शहीद अब्दुल गनी शाह मजार की भूमि को एएसडीएम कोर्ट ने पिछले साल के आखिर में बंजर घोषित कर दिया था। इसके बाद इसे रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के तौर पर दर्ज कर दिया गया। प्रशासन के मुताबिक इसके बाद वक्फ बोर्ड को पत्र लिखकर मजार की जमीन को सरकारी बताते हुए कब्जा हटाने का अनुरोध किया था। इधर, बिना नक्शे की मजार बनाए जाने को लेकर भाजपा नेताओं द्वारा साल-2019 में दायर मुकदमे पर सुनवाई करते हुए नियत प्राधिकारी कोर्ट/एसडीएम सदर की कोर्ट ने नौ जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया। साथ ही मजार कमेटी को नक्शे के संबंध में दावा करने का एक और मौका देते हुए 10 जनवरी को प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन मजार कमेटी कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी।
प्रशासन का दावा था कि 11 जनवरी को मजार कमेटी के अध्यक्ष ने निर्माण को अवैध बताते हुए स्वेच्छा से तोड़ने की लिखित सहमति एसडीएम सदर को दी थी। इसी के साथ निर्माण के ध्वस्तीकरण का कार्य शुरू होे गया। तीन दिन तक चले अभियान में मजार का गुंबद और दक्षिणी हिस्सा ढहा दिया गया। हालांकि, मजार कमेटी से जुड़े लोग मजार ढहाए जाने में अपनी भूमिका पर कुछ भी कहने से बचते रहे। वहीं, एसडीएम सदर श्रुति शर्मा का कहना था कि मजार ढहाने में प्रशासन की कोई भूमिका नहीं है। वहां केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैनात है।
मजार पर जुटे लोग, मांगी दुआ : हजरत शहीद अब्दुल गनी शाह की मजार पर प्रत्येक बृहस्पतिवार को जायरीन की भीड़ जुटती है। सुबह से ही लोगों का मजार पर आना-जाना लगा रहा। हालांकि, कार्रवाई के चलते अन्य बृहस्पतिवार की अपेक्षा भीड़ कम रही। फिर भी लोग मजार पर पहुंचे और नमाज पढ़ी और दुआएं मांगीं। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मजार की स्थिति देखने भी पहुंचे। वहीं, मजार पर 11 जनवरी से तैनात सुरक्षाकर्मी बृहस्पतिवार को नहीं दिखे। फोर्स पूरी तरह हटा ली गई थी, शांति व्यवस्था बरकरार है।
भाजपा नेताओं ने मजार के अवैध निर्माण को लेकर की थी शिकायत : गोरखपुर रोड ओवरब्रिज के किनारे बने मजार को बिना नक्शा के बनाए जाने की शिकायत साल 2019 में नवीन सिंह, श्रीनिवास मणि, मारकंडेय प्रसाद तिवारी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजन यादव, अंबिकेश पांडेय समेत कई भाजपा नेताओं ने की थी। इसके बाद हुई सुनवाई में नियत प्राधिकारी कोर्ट मजार को बिना नक्शा के बनाए जाने के चलते अवैध घोषित कर दिया। इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो गई। इस मामले में एएसडीएम कोर्ट ने पहले ही मजार की जमीन को सरकारी बंजर घोषित कर दिया था। इसके बाद जमीन सरकार के नाम दर्ज हो चुकी है।