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दीयों की रोशनी से जगमगा उठे शहर के मंदिर

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दीयों की रोशनी से जगमगा उठे शहर के मंदिर
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देवरिया। कार्तिक पूूर्णिमा के अवसर पर सोमवार शाम को लोगों ने नदी-घाटों, मंदिरों एवं घरों में दीपदान कर देव दीपावली मनाया। शहर के प्रमुख मंदिर दीयों से जगमगा उठे।
कसया रोड के दक्षिण भारतीय शैली में बने तिरुपति बालाजी मंदिर में देव दीपावली हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस मौके पर मंदिर के चारों तरफ हजारों दीये सजाए गए थे। पीठाधीश्वर रामानुजाचार्य स्वामी राजनारायणाचार्य ने बताया कि देवताओं द्वारा मनाई जाने वाली दीपावली को देव दीपावली कहा जाता है। ये दीपावली प्राय: मंदिरों में ही मनाई जाती है। इस पर्व को दक्षिण भारत के मंदिरों में विशेष रूप से मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा को विष्णु मंदिरों में एक दीप जलाने से ही दस हजार दीप दान करने का फल प्राप्त हो जाता है। दीपक तो स्वयं जलकर सभी को प्रकाश देता है, ठीक उसी प्रकार देव दीपावली पर हम सभी संकल्प लें कि हमलोग स्वयं कष्ट सहन करके भी दूसरों की सेवा करेंगे। दीप जलाकर तुलसी की सुखी हुई लकड़ी का धूप भगवान को दिखाने से 11 हजार यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है।
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कार्तिक महीने को दामोदर मास भी कहा जाता है, ये महीना भगवान श्रीराम एवं श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है। ये महीना शरद ऋतु में आता है, इसके बाद हेमंत ऋतु होता है। उधर, कार्तिक पूर्णिमा पर भटनी के जलपा माता मंदिर स्थित नदी घाट पर सोमवार की शाम दीपदान करने के लिए नगरवासियों की भीड़ उमड़ी रही। सूर्यास्त होते ही छोटी गंडक नदी घाट पर कतार में सजाए गए दीपों को जला दिया गया, जिससे पूरा घाट जगमग रोशनी से नहा उठा। गंगा घाट पर बनाए गई आकर्षक रंगोली पर जलते दीपों की छटा देखते ही बन रही थी। गंगा घाट की सीढ़ियों पर जलते दीपों से की गई सजावट देखने शाम को महिला-पुरुष सहित बड़ी संख्या में बच्चे भी पहुंचे थे। सूर्यास्त होते ही घाट पर मां गंगा की विधि-विधान से पूजन-अर्चन व भव्य आरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तजन शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगा आरती के बाद जलपा माता मंदिर घाट की सीढ़ियों पर सजाकर रखे गए मिट्टी के दीयों को जला दिया गया, जिसकी रोशनी से पूरा घाट नहा उठा। घाट पर भजन कीर्तन का दौर भी अनवरत चलता रहा। देव दीपावली का मनोरम नजारा देेखने के लिए सायंकाल से देर रात तक लोगों का तांता लगा रहा।
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